चंडीगढ़: पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों के लिए सज़ा-ए-मौत या उम्रकैद का प्रावधान करने की तैयारी में है। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। इसके बाद विधेयक को विधानसभा सत्र में पेश किया जा सकता है। इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने भी ऐसा विधेयक पारित किया था लेकिन केंद्र ने इसे वापस कर दिया था।
कानूनी विशेषज्ञों ली जा रही राय
श्री गुरु ग्रंथ साहिब सहित धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों को सख्त सजा देने के लिए मान सरकार विधानसभा में बिल पेश कर सकती है। फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की राय ली जा रही है कि ऐसा जुर्म करने वालों को सजा-ए-मौत की सजा दी जा सकती है या उम्रकैद...। सात जुलाई को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इसे पारित कर 10 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र में बिल को पेश किया जा सके।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ऐसा बिल पारित किया था
बता दें कि इससे पहले भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने इससे मिलता जुलता एक विधेयक पारित किया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने 28 अगस्त, 2018 को इस बिल को पारित करके राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा था। इसे केंद्र सरकार ने यह कहकर लौटा दिया था कि अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारत न्याय संहिता लागू कर दी गई है और उसमें धार्मिक ग्रंथों को लेकर जो सजाओं का प्रविधान किया गया है, उसके तहत सरकार अपना एक्ट बना ले।
कैप्टन अमरिंद सिंह की सरकार ने अगस्त 2018 में आइपीसी की धारा 295 में संशोधन करते हुए 295ए बिल पारित किया था। इस बिल में धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों को आजीवन कारावास जैसी कठोर सजा का प्रावधान किया गया था। लेकिन लंबे समय तक इस बिल पर कोई फैसला नहीं हुआ।
सीएम मान ने अमित शाह को लिखी थी चिट्ठी
इसके बाद सूबे में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त करने के लिए 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी। इसी बीच केंद्र सरकार ने आइपीसी को खत्म कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू कर दी और राज्य सरकार को विधेयक लौटाते हुए इसे देखकर अपना एक्ट पारित करने को कहा। भारतीय न्याय संहिता में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर धारा 298, 299 और 300 लगाई गई है।