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पिता बनने के 17 दिन बाद तिरंगे में घर लौटा ग्रेनेडियर सुनील कुमार, नवजात को गोद में लिए बेसुध होकर गिर पड़ीं पत्नी

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Jun 02, 2026 07:27 am IST,  Updated : Jun 02, 2026 07:27 am IST

ग्रेनेडियर सुनील कुमार अपने नवजात बेटे को गोद में लेकर भविष्य के सपने बुन रहे थे। पत्नी रिंकू देवी के चेहरे पर भी मातृत्व की चमक थी। लेकिन एक सड़क दुर्घटना ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

indian army soldier sunil kumar- India TV Hindi
हजारों नम आंखों ने दी ग्रेनेडियर सुनील कुमार को अंतिम विदाई। Image Source : REPORTER INPUT

झुंझुनूं: जिस घर में महज 17 दिन पहले नवजात बेटे के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थीं, जहां रिश्तेदार बधाइयां देने पहुंच रहे थे और परिवार दशोठण की तैयारियों में जुटा था, सोमवार को उसी घर का आंगन चीख-पुकार और मातम से भर गया। भारतीय सेना के ग्रेनेडियर सुनील कुमार जब तिरंगे में लिपटकर अपने गांव इंडाली पहुंचे तो हर आंख नम हो गई और पूरा गांव शोक में डूब गया।

घर के आंगन में तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर मां कमला देवी की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। पिता रघुवीर सिंह बार-बार अपने जवान बेटे को निहारते रहे, मानो अभी वह उठकर उन्हें आवाज दे देगा। लेकिन नियति का फैसला कुछ और था। जिस बेटे पर पूरे परिवार को गर्व था, वह हमेशा के लिए खामोश हो चुका था।

बेटे के जन्म की खुशियां मातम में बदलीं

30 वर्षीय ग्रेनेडियर सुनील कुमार भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। कुछ दिन पहले ही वह छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार में बेटे का जन्म हुआ था और हर तरफ खुशी का माहौल था। सुनील अपने नवजात बेटे को गोद में लेकर भविष्य के सपने बुन रहे थे। पत्नी रिंकू देवी के चेहरे पर भी मातृत्व की चमक थी। लेकिन 29 मई को एक सड़क दुर्घटना ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सुनील को पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जयपुर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

14 किमी तक उमड़ा जनसैलाब, 'सुनील अमर रहे' के नारों से गूंजा आसमान

सोमवार को जयपुर से पार्थिव शरीर झुंझुनूं पहुंचा तो अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। झुंझुनूं से इंडाली गांव तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा लिए युवा "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "ग्रेनेडियर सुनील कुमार अमर रहे" के नारे लगा रहे थे। रास्ते भर लोग घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देते रहे। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर अंतिम सलाम किया गया। यह सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि अपने बेटे को खोने वाले परिवार के प्रति पूरे समाज की संवेदना और एक सैनिक के प्रति सम्मान का अभूतपूर्व दृश्य था।

गोद में मासूम बेटा, सामने पति का पार्थिव शरीर

सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया जब सुनील का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। गोद में 17 दिन का नवजात बेटा लिए पत्नी रिंकू देवी जैसे ही अपने पति के अंतिम दर्शन के लिए आगे बढ़ीं, उनकी चीख सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। जिस बच्चे ने अभी दुनिया को ठीक से देखना भी शुरू नहीं किया, उसके सिर से पिता का साया उठ चुका था। रिंकू देवी बार-बार पति को पुकारती रहीं और फिर बेसुध होकर गिर पड़ीं। यह दृश्य देखकर गांव की महिलाओं सहित वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें छलक उठीं।

सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

गांव के श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ ग्रेनेडियर सुनील कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी के तौर पर जवानों ने हथियार झुकाकर अपने साथी को श्रद्धांजलि अर्पित की। हजारों नम आंखों की मौजूदगी में वीर सपूत पंचतत्व में विलीन हो गया। लेकिन अपने पीछे वह एक ऐसी कहानी छोड़ गया, जो हर किसी को भावुक कर गई—एक ऐसा पिता, जिसने अपने बेटे की किलकारियां सुनीं, लेकिन उसे बड़ा होते देखने का सौभाग्य नहीं मिला। एक ऐसा बेटा, जिस पर पूरे गांव को गर्व था और एक ऐसा सैनिक, जिसे पूरा क्षेत्र कभी नहीं भूलेगा।

(रिपोर्ट- अमित शर्मा)

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