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29 जून को सुहागिन महिलाएं रखेंगी अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत, यहां जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jun 28, 2026 08:37 pm IST,  Updated : Jun 28, 2026 08:37 pm IST

सोमवार को वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रख कर वट वृक्ष की पूजा करती हैं। तो आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2026- India TV Hindi
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। वट सावित्री पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। आपको बता दें कि वट पूर्णिमा व्रत वट सावित्री व्रत के समान है।  वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाता है।  वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत उत्तर भारत की अपेक्षा महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में ज्यादा मनाया जाता है। आपको बता दें कि वट सावित्री पूर्णिमा के दिन भी वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करते हुए अपने सुहाग की अखंड सौभाग्यवती का कामना करती हैं। तो आइए जानते हैं वट पूर्णिमा पूजा शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

वट पूर्णिमा व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 29 जून को मध्यरात्रि 3 बजकर 6 मिनट पर होगा।  पूर्णिमा तिथि का समापन 30 जून 2026 को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगा।

वट पूर्णिमा व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 38 मिनट से सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर होगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 1 बजकर 8 मिनट पर होगा।

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि

  • वट पूर्णिमा वाले दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर लें और साफ कपड़े पहनें।
  • इस दिन लाल, गुलाबी, पीला जैसे शुभ रंग के कपड़े ही पहनें। 
  • इसके बाद 16 श्रृंगार जरूर करें और फिर व्रत का संकल्प लें।
  • एक बांस से बनी डलिया लें और उसमें सात प्रकार के अनाज, फूल, फल, रोली, सिंदूर, कच्चा सूत, धूप-दीप, बांस का पंखा और वस्त्र समेत  श्रृंगार की सामग्री को रखें।
  • वट वृक्ष के नीचे सावित्री माता और सत्यवान की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  • इसके बाद पूजा सामग्री अर्पित करें और बांस के पंखे से हवा करें।
  • फिर बरगद के पेड़ की 11, 21, 51 या फिर 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें।
  • सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें। वट पूर्णिमा की कथा सुनें बिना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
  • पूजा के बाद अपने पति के पैर छुएं और बांस के पंखा से हवा करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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