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Importance of Dussehra: दशहरा क्यों मनाया जाता है, क्या है विजयादशमी का महत्व? जानिए इस महापर्व के पीछे की पौराणिक कथाएं

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Sep 30, 2025 01:22 pm IST,  Updated : Sep 30, 2025 01:22 pm IST

Importance of Dussehra: बुराई पर अच्छाई की हमेशा ही जीत होती है। विजयादशमी का पर्व इसी प्रतीक के तौर पर हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। रावण के पुतला दहन के साथ ही इस दिन दुर्गा प्रतिमाओं की झांकियां निकाली जाती हैं। चलिए जानते हैं दशहरा पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाएं

 दशहरा क्यों मनाया...- India TV Hindi
दशहरा क्यों मनाया जाता है? Image Source : PTI

Mythological Stories of Dussehra: भारत त्योहारों का देश कहलाता है। यहां धर्म और जातियों के लोग रहते हैं, जो एकजुट होकर हर फेस्टिवल को सेलिब्रेट करते हैं। इस देश में हर त्योहार को मनाने के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ ही कोई न कोई महत्वपूर्ण संदेश होता है। अब जैसे विजयादशमी के पर्व को ही ले लीजिए।

नवरात्रि में नौ दिन शक्ति की उपासना के बाद दशमी को दशहरा मनाया जाता है, ताकि हम अपने अंदर के क्रोध, लालच, भ्रम, नशा, ईर्ष्या, स्वार्थ, अन्याय, अमानवीयता एवं अहंकार को नष्ट करें। चलिए जानते हैं विजयादशमी का पर्व क्यों मनाया जाता है?, यह त्योहार हमें क्या महत्वपूर्ण संदेश देता है और इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं क्या हैं?

अधर्म पर हुई थी धर्म की जीत

कहा जाता है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। दशहरे से जुड़ी पौराणिक कथा यही महत्वपूर्ण संदेश देती है। हिंदू धर्म में विजयादशमी का त्योहार अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथ श्री रामायण में उल्लेख मिलता है कि इन दिन प्रभु राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। रावण धोखे से श्री राम की पत्नि देवी सीता का हरण करके लंका लेकर गया था।

छलपूर्वक पतित पावनी देवी जानकी का हरण करने के अलावा दशानन ने ऐसे अनगिनत कुकर्म किए थे, जिनके लिए उस अहंकारी को दंड मिलना जरूरी था। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच घमासान युद्ध हुआ, जहां रावण को देवताओं से अनेक दिव्य वरदान प्राप्त राक्षसों का राजा और भगवान राम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया। राम-रावण का युद्ध और लंकेश का अंत बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार 

दशहरा मनाने के पीछे प्रचलित पौराणिक कथाएं

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाते हैं। इस दिन रावण के पुतला जलाया जाता है। श्री राम द्वारा रावण का वध किए जाने और माता जानकी को लंकापति के चंगुल से छुड़ाने की खुशी तो अहम कारण है ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि और भी कई कारणों से दशहरा पर्व मनाने की परंपरा है। चलिए जानते हैं दशहरा मनाने के पीछे और कौन सी पौराणिक कथाएं प्रचलित है।

रावण वध के कारण कहलाया दशहरा

दशहरा का रामायण की कथा से गहरा संबंध माना जाता है। इसके अनुसार, प्रभु राम और रावण के बीच लगभग चौदह दिनों तक युद्ध चला, जिसमें रावण ने भाई कुंभ कर्ण और पुत्र मेघनाद समेत सेना का बड़ा हिस्सा खो दिया। इस दौरान प्रभु राम ने आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मां दुर्गा की आराधना की थी। इसके बाद दशमी को उन्होंने रावण का अंत किया था। आखिरी दिन भगवान राम ने दस सिर वाले रावण का वध किया और न्याय और धर्म की स्थापना की। विजयादशमी मनाने के पीछे यह प्रमुख वजह मानी जाती है। 

असत्य पर सत्य की विजय से बना विजयादशमी

दूसरी पौराणिक कथा के मुताबिक, मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का मर्दन किया था। दोनों के बीच पूरे नौ दिनों तक भयानक युद्ध हुआ था। आखिरकार दसवें दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत करके संसार क उसके अत्याचारों से मुक्ति दी थी। यही वजह है कि आश्विन माह की दशमी तिथि को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। 

पांडु पुत्र अर्जुन को मिली थी विजय

तीसरी पौराणिक कथा महाभारत से ली गई है, जिसमें बताया गया है कि दुर्योधन और उसके मामा शकुनि ने पांडवों को चौसर (या द्यूत क्रीड़ा) के खेल में हरा दिया था। शर्त के अनुसार पांडवों को 12 वर्षों तक निर्वासित रहना था और एक साल के लिए अज्ञातवास भी मिला था।

अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने अपनी गांडीव धनुष को शमी के वृक्ष में छुपाया था और एक ब्रिहन्नला का छद्म रूप लेकर राजा विराट के महल में रहने लगे थे। एक बार जब राजा के पुत्र ने अर्जुन से अपनी गाय की रक्षा के लिए मदद मांगी तो अर्जुन ने शमी के वृक्ष से अपना गांडीव निकालकर दुश्मनों को हराया था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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