जम्मू कश्मीर में आतंक पर आस्था भारी पड़ती नजर आ रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद गांदरबल की माता खीर भवानी के जन्मदिन पर कश्मीर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हर साल की तरह इस साल भी जम्मू और कश्मीर के तुलमुल्ला में माता खीर भवानी का जन्मदिन बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। माता खीर भवानी मंदिर में आज माता की जयंती मनाई जा रही है, ऐसे में काफी संख्या भक्तगण माता के दर्शन के लिए आए हुए हैं।
कुंड बताता है कश्मीर का भविष्य
मान्यता है कि खीर भवानी मंदिर में एक पवित्र कुंड है, जो माता रानी का जल स्वरूप है। उसके पानी के रंग का अलग ही आध्यात्मिक महत्व है। कहा जाता है कि देवी राज्ञा देवी (खीर भवानी) के कुंड का जल कश्मीर और संसार का भविष्य बताता है। इस कुंड में बदलता जल का रंग बताता कि कश्मीर और संसार में विनाश आएगा या खुशहाली। भक्त माता को दूध और जल चढ़ाते हैं और पूजा-अर्चना कर मनोकामना मांगते हैं।
कौन-सा रंग विनाश और कौन-सा खुशहाली का प्रतीक?
हिंदू परंपरा के अनुसार, ये रंग-बिरंगे जल देवी का मूड को दर्शाने के शगुन के रूप में देखा जाता है। साथ ही कश्मीर घाटी में होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी की जाती है। अधिकांश रंग, जैसे हरा शांति और हल्के रंग को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है या तटस्थ और शुभ माना जाता हैं। लेकिन काले या गहरे रंग को व्यापक रूप से अशुभ माना जाता है, जिसे विनाशकारी आपदाओं या अशांत समय का संकेत समझा जाता है। इस कुंड में लाल, हरा, नीला और काला रंग दिखता है। लाल और काला रंग विनाश तो हरा और नीला खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
कई बार भविष्यवाणी हुई है सच
कई बार कुंड का काला रंग होना विनाश साबित हुआ है, जैसे कि 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन या 1999 में कारगिल युद्ध और COVID-19 महामारी, और 2014 में केमिकल ब्लड से पहले लाल होना शामिल है।
ये भी पढ़ें:
निर्जला एकादशी पर करें भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जप, पूरी होंगी सब मनोकामनाएं
महेश नवमी जून में मनाई जाएगी इस दिन, जान लें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त