Makar Sankranti 20026 Date: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान-दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे- उत्तरायण, पोंगल, संक्रांति, खिचड़ी, माघ बिहू आदि। बता दें कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्राति मनाई जाती है।
पूरे वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां होती हैं, जिनमें से सूर्य की मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति बेहद खास हैं। इन दोनों ही संक्रांति पर सूर्य की गति में बदलाव होता है। जब सूर्य की कर्क संक्रांति होती है तो सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन और जब सूर्य की मकर संक्रांति होती है, तो सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है।
सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव ही मकर संक्रांति कहलाता है इसलिए कहीं-कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। उत्तरायण काल में दिन बड़े हो जाते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। वहीं दक्षिणायन काल में ठीक इसके विपरीत-रातें बड़ी और दिन छोटा होने लगता है।
मकर संक्रांति की डेट को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तो आपको बता दें कि 15 नहीं बल्कि 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। वहीं स्नान-दान के लिए मुहूर्त की बात करें तो मकर संक्रांति पुण्य काल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वहीं मकर संक्रांति महा पुण्य काल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। मकर संक्रांति के पुण्यकाल के समय स्नान-दान करना और सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल के समय दान-पुण्य जरूर करें। इस मुहूर्त में स्नान-दान करने से सभी पाप मिट जाते हैं। साथ ही धन-धान्य में भी वृद्धि होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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