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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान के साथ ही करें ये काम, मिलेगा पुण्य फल, धन-धान्य में होगी वृद्धि

 Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Jan 13, 2026 08:54 pm IST,  Updated : Jan 13, 2026 08:54 pm IST

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। लेकिन इस दिन स्नान-दान के साथ ही इन कामों को करने से भी पुण्य लाभ मिलते हैं।

मकर संक्रांति 2026- India TV Hindi
मकर संक्रांति 2026 Image Source : FILE IMAGE

Makar Sankranti 2026: शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब भी एक से दूसरे राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहा जाता है। बता दें कि इस बार कुछ पंचांग में मकर संक्रांति 14 जनवरी, तो वहीं कुछ में 15 जनवरी को बताया गया है। दरअसल इस वर्ष 14 जनवरी यानी आज के दिन सूर्य का मकर राशि में गोचर रात 2 बजकर 43 मिनट पर होगा। लेकिन यहां एक बात स्पष्ट बता दें कि स्नान-दान का ज्यादा महत्व सुबह के समय रहता है। लिहाजा मकर संक्रांति का स्नान-दान गुरुवार के दिन किया जाना ज्यादा लाभ दायक सिद्ध होगा। तो आइए अब जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान के साथ ही और कौनसे कार्य करने चाहिए।

- सभी संक्रांति पर तीर्थस्थलों पर स्नान और दान का बड़ा ही महत्व है। मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन अगर आप वहां जाने में असमर्थ हैं, तो इस दिन घर पर ही सामान्य पानी से स्नान करना चाहिए और हो सके तो, उस जल में थोड़ा–सा पवित्र नदियों का जल मिलाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है और उसे धन की कोई कमी नहीं होती। 

- कहते हैं संक्रांति से एक दिन पूर्व, यानि मकर संक्रांति के दिन व्यक्ति को केवल एक बार मध्याहन में भोजन करना चाहिए और संक्रांति के दिन दांतों को साफ करके जल में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए या स्नान से पहले तिल का तेल या तिल का उबटन लगाना चाहिए। 

- संक्रांति के दिन दान दक्षिणा या धार्मिक कार्य का सौ गुना फल मिलता है। कहा भी गया है- माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम। स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥

- इस दिन व्यक्ति को किसी गृहस्थ ब्राह्मण को भोजन या भोजन सामग्रियों से युक्त तीन पात्र देने चाहिए और संभव हो तो यम, रुद्र और धर्म के नाम पर गाय का दान करना चाहिए। यदि किसी के बस में ये सब दान करना नहीं है, तो वह केवल फल का दान करें, लेकिन कुछ न कुछ दान जरूर करें। साथ ही यह श्लोक पढ़ना चाहिए। श्लोक इस प्रकार है- 'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्णवर्कपद्मजान्। तथा ममास्तु विश्वात्मा शंकरः शंकरः सदा।।' इसका अर्थ है- मैं शिव एवं विष्णु तथा सूर्य एवं ब्रह्मा में अन्तर नहीं करता। वह शंकर, जो विश्वात्मा है, सदा कल्याण करने वाला हो। 

- मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। लिहाजा मकर संक्रांति के दिन उड़द की दाल और चावल का दान किया जाता है। साथ ही तिल, चिड़वा, सोना, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का भी महत्व है। दान के बाद बिना तेल वाला भोजन करना चाहिए और यथाशक्ति अन्य लोगों को भी भोजन देना चाहिए।  

- शास्त्रों के अनुसार पुत्रवान गृहस्थ को संक्रांति पर, कृष्ण एकादशी पर और चन्द्र और सूर्य ग्रहण पर उपवास नहीं करना चाहिए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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