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Som Pradosh Vrat Katha PDF: आज है साल का पहला सोम प्रदोष व्रत, पूजा के समय जरूर पढ़ें ये पावन कथा, भोलेनाथ की बरसेगी विशेष कृपा

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Mar 16, 2026 06:53 am IST, Updated : Mar 16, 2026 06:53 am IST

Som Pradosh Vrat Katha (सोम प्रदोष व्रत कथा) PDF: आज यानी 16 मार्च 2026 को साल का पहला सोम प्रदोष व्रत है। मान्यता अनुसार ये व्रत रखने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। यहां आप जानेंगे सोम प्रदोष व्रत की कथा।

som pradosh katha- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY सोम प्रदोष व्रत कथा

Som Pradosh Vrat Katha (सोम प्रदोष व्रत कथा) PDF: सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह भगवान शिव के अत्यंत प्रिय व्रतों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत रखने से जीवन के सारे कष्टों से छुटकारा मिल जाता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिष अनुसार इस व्रत से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत हो जाती है। साल का पहला प्रदोष व्रत आज यानी 16 मार्च 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:30 से 08:54 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान शिव की विधि विधान पूजा करने के साथ उनकी पावन कथा भी जरूर पढ़ें।

Som Pradosh Vrat Katha (सोम प्रदोष व्रत कथा)

सोम प्रदोष व्रत की कथा अनुसार एक नगर में एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी। उसका कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए वो सुबह होते ही अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। भिक्षाटन से जो कुछ मिलता था उसी से वो अपने और अपने पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी जब अपने घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में मिला। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई और वो उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। उसके राज्य पर शत्रु सैनिकों ने आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था।

राजकुमार ब्राह्मणी और ब्राह्मण-पुत्र के साथ उनके घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा, जो उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति के माता-पिता राजकुमार से मिलने आए। उन्हें भी राजकुमार पसंद आ गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को भगवान शिव सपने में दिखाई दिए और उन्होंने उनको आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। उन्होंने वैसा ही किया।

ब्राह्मणी विधि विधान प्रदोष व्रत किया करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की मदद से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और अपने पिता के राज्य को फिर से प्राप्त कर लिया। इसके बाद वो अपने परिवार सहित आनन्दपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना मंत्री बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही इस व्रत को करने से शंकर भगवान अपने सभी भक्तों के भी दिन फेरते हैं। बोलो हर हर महादेव !

Som Pradosh Vrat Katha PDF Download

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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