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आदित्य आराधना से मिलती है सफलता और पॉजिटिविटी, सूर्य भगवान की आरती 'सारथी अरुण हैं प्रभु तुम...' से करें उनकी महिमा का बखान

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse Published : Oct 27, 2025 12:10 pm IST, Updated : Oct 27, 2025 12:10 pm IST

Surya Bhagwan ki Aarti: हिंदू धर्म में सूर्य देवता को जीवन का आधार और शक्ति का स्रोत माना गया है। जो व्यक्ति सूर्य की आराधना करता है, उसे जीवन भर अच्छी सेहत, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। छठ पूजा में उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। यहां पढ़िए उनकी महिमा का बखान करने वाली आरती।

Surya Bhagwan ki Aarti- India TV Hindi
Image Source : FACEBOOK/UNSPLASH सूर्य भगवान की आरती

Surya Bhagwan ki Aarti Hindi Lyrics: महापर्व छठ पूजा सूर्य देवता और छठी मैया को समर्पित है। यह महत्वपूर्ण पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। चार दिवसीस इस पर्व की शुरुआत नहाए-खाए से होती है, जो चौथे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य नवग्रहों में एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं, जिन्हें देखा जा सकता है।

सूरज को जल अर्पित कर की जाती है उनकी आराधना

छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूरज को जल अर्पित कर उनकी आराधना की जाती है। मान्यता है कि सूर्य की उपासना से शरीर में ऊर्जा, मन में स्थिरता और जीवन में समृद्धि आती है। इस परंपरा के पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है। यहां पढ़िए सूर्य भगवान की आरती के लिरिक्स, जो छठ पर्व के सूर्यास्त और सूर्योदय के समय भगवान आदित्य को जल अर्पित करते समय गई जाती है। 

Surya Bhagwan ki Aarti: सूर्य भगवान की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

 

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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