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Adhikmas 2026: अधिकमास में वर्जित हैं शुभ कार्य, लेकिन भगवान विष्णु ने क्यों दिया इसे अपना नाम? यहां जानें

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Apr 15, 2026 01:11 pm IST,  Updated : Apr 15, 2026 01:11 pm IST

Adhikmas 2026: अधिक मास को को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। तो यहां जानिए भगवान विष्णु और अधिकमास की पौराणिक कथा, महत्व के बारे में।

अधिकमास 2026- India TV Hindi
अधिकमास 2026 Image Source : PEXELS

Adhikmas 2026: इस साल अधिक मास लगने वाला है। अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी और समाप 15 जून को होगा। अधिकमास को मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। स्नान-दान, पूजा-पाठ, यज्ञ, तप और हवन आदि का विशेष महत्व है। इन सभी कार्यों को करने से व्यक्ति को श्री हरि विष्णु की खास कृपा और पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। आपको बता दें कि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है।

हिंदू धर्म में अधिक मास में शादी-विवाह, मुंडन,  गृहप्रवेश, सगाई जैसे शुभ कार्य करना पूरी तरह से वर्जित होता है। इस महीने में सभी सांसारिक मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं। वहीं दूसरी इस महीने को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है। अधिक मास को भगवान विष्णु ने अपने स्वरूप का नाम दिया है। तो आइए जानते हैं जिस माह में शुभ कार्य नहीं होते हैं उसे नारायण ने अपना नाम क्यों दिया था।

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहने की मान्यता क्या है?

प्रत्येक मास का कोई न कोई अधिपति देवता नियुक्त किया गया है लेकिन अधिक मास का अपना कोई स्वामी नहीं है। यही वजह है देव- पितर आदि की पूजा और मंगल कार्यों के लिए यह महीना त्याज्य माना जाता था, लेकिन निन्दित माने जाने वाले इस महीने की व्यथा देखकर भगवान पुरुषोत्तम ने स्वयं इसे अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस महीने का स्वामी हो गया हूं। अहमेते यथा लोके प्रथितः पुरुषोत्तमः। तथायमपि लोकेषु प्रथितः पुरुषोत्तमः।। जिस प्रकार मैं इस लोक में 'पुरुषोत्तम' नाम से विख्यात हूं, उसी प्रकार यह मलमास भी इस लोक में 'पुरुषोत्तम' नाम से प्रसिद्ध होगा। यह महीना बाकी सब महीनों का अधिकारी होगा और इसे संपूर्ण विश्व में पवित्र माना जाएगा। भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि जो भी मनुष्य इस मास में जप, तप, दान और भगवत भक्ति करेगा, उसे अन्य महीनों की तुलना में अनंत गुना फल प्राप्त होगा।

अधिक मास में क्या करें क्या न करें

  • मांगलिक कार्य न करें
  • शादी, सगाई, मुंडन, नामकरण न करें
  • नया घर न खरीदें और न ही गृह प्रवेश करें
  • इस साल कोई भी व्रत शुरू न करें
  • श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करें
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ और मंत्रों का जाप करें
  • अधिक मास में दान, पूजा-पाठ और दीप दान करें

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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