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Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है? जानें धार्मिक कारण और इस तिथि का महत्व

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Apr 13, 2026 05:32 pm IST,  Updated : Apr 13, 2026 05:32 pm IST

Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया साल 2026 में 19 अप्रैल को है। इस दिन धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और मांगलिक कार्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन का महत्व इतना अधिक क्यों है और आखिर क्यों हम अक्षय तृतीया मनाते हैं, आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

Akshaya Tritiya- India TV Hindi
अक्षय तृतीया Image Source : FREEPIK

Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म की पुण्य तिथियों में से एक है। साल 2026 में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस दिन धार्मिक और मांगलिक कार्य करके शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। इसके साथ ही दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान भी इस शुभ दिन पर किया जाता है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस दिन को इतना शुभ क्यों माना जाता है? आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे और बताएंगे कि अक्षय तृतीया के दिन को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इतना शुभ क्यों माना जाता है।

अक्षय तृतीया मनाने के पीछे धार्मिक कारण 

अक्षय तृतीया को शुभ तिथि मानने के पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण मौजूद हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में- 

मां गंगा का अवतरण 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माता गंगा का अवतरण पर धरती पर हुआ था। माता गंगा ने धरती पर अवतरित होकर राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया था। 

परशुराम जन्मोत्सव 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ था। 

महाभारत महाकाव्य की रचना 

माना जाता है कि इसी दिन से ऋषि वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत महाकाव्य की रचना करना शुरू किया था। 

त्रेतायुग का प्रारंभ 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। यही वजह है कि अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा जाता है। 

कृष्ण-सुदामा का मिलन

शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे। 

अक्षय पात्र की पांडवों को हुई थी प्राप्ति

इसी दिन पर भगवान सूर्य ने वनवास का दंश झेल रहे पांडवों को अक्षय पात्र दान किया था। इस पात्र का भोजन कभी समाप्त नहीं होता थै। 

अक्षय तृतीया मनाने के ज्योतिषीय कारण 

ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ग्रहों के राजा सूर्य और मन के कारक ग्रह चंद्रमा दोनों उच्च अवस्था में रहते हैं। इन दोनों ग्रहों का उच्च अवस्था में होना दुर्लभ संयोग है। सूर्य-चंद्रमा का उच्च का होना मानसिक और भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिए इस दिन खरीदारी करना और धार्मिक-मांगलिक कार्य करना, नए कार्य की शुरुआत करना बेहद शुभ माना गया है। 

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया के दिन मन के कारक ग्रह चंद्रमा और आत्मा के कारक ग्रह सूर्य दोनों उच्च अवस्था में रहते हैं। ऐसे में धार्मिक, आध्यात्मिक गतिविधियां करना इस दिन बेहद लाभदायक माना गया है। इस दिन योग-ध्यान और मंत्र जप करने से आपको आलौकिक अनुभव हो सकते हैं। इसके साथ ही मानसिक और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए भी इस दिन आध्यात्मिक गतिविधियां करना शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन किए गए मांगलिक और धार्मिक कार्यों में भी सफलता आपको प्राप्त होती है। यही वजह है कि इस दिन को अबूझ मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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