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Bhaum Pradosh Vrat Katha: 28 अप्रैल को भौम प्रदोष व्रत, यहां जानिए इस दिन कौन सी कथा पढ़नी है

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Apr 28, 2026 06:22 am IST,  Updated : Apr 28, 2026 06:22 am IST

Bhaum Pradosh Vrat Katha: जो प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है उसे भौम प्रदोष व्रत या मंगल प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इस व्रत को रखने से भगवान शिव की असीम कृपा तो प्राप्त होती ही है साथ ही कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी मजबूत हो जाती है।

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भौम प्रदोष व्रत कथा Image Source : CANVA

Bhaum Pradosh Vrat Katha (भौम प्रदोष व्रत कथा): धार्मिक मान्यताओं अनुसार भौम प्रदोष व्रत रखने से ऋण से मुक्ति, भूमि-भवन आदि विवादों का निपटारा और शारीरिक बल में वृद्धि होती है। इतना ही नहीं इस व्रत के शुभ प्रभाव से मंगल ग्रह से जुड़े नकारात्मक प्रभाव भी कम हो जाते हैं। बता दें 28 अप्रैल 2026 को भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। जिसकी पूजा का मुहूर्त 28 अप्रैल की शाम 06:54 से रात 09:04 बजे तक रहेगा। यहां आप जानेंगे भौम प्रदोष व्रत की पावन कथा।

भौम प्रदोष व्रत कथा (Bhaum Pradosh Vrat Katha)

भौम प्रदोष व्रत की कथा अनुसार एक समय की बात है। एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी जिसका एक ही पुत्र था। वृद्धा भगवान हनुमान की बड़ी भक्त थी इसलिए वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखा करती थी। एक दिन हनुमानजी ने अपनी भक्तिनी की श्रद्धा का परीक्षण करने का सोचा। जिसके लिए हनुमान जी साधु का वेश धारण करके वृद्धा के घर पहुंते और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त ! जो हमारी इच्छा पूरी कर सके? 

आवाज सुन वृद्धा जल्दी से बाहर आई और साधु को प्रणाम कर बोली- आज्ञा महाराज! आपकी जो भी इच्छा हो बताएं। हनुमान वेशधारी साधु बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तुम थोड़ी जमीन लीप दो। वृद्धा दुविधा में पड़ गई और हाथ जोड़कर बोलने लगी महाराज! इस कार्य के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी। फिर साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला। मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा। साधु महाराज के ऐसे वचन सुनकर वृद्धा घबरा गई, परंतु वह प्रतिज्ञाबद्ध थी। इस कारण से उसने अपने पुत्र को साधु को सौंप दिया।

साधु के वेश में हनुमान जी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर वृद्धा मन से घर चली गई। जब भोजन तैयार हो गया तब साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा कि भोजन बन गया है। अब तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी भोजन कर ले। इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर अब आप मुझे और कष्ट न दें।

लेकिन जब साधु महाराज ने फिर से वृद्धा से बेटे को बुलाने की बात कही तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई। जैसे ही वृद्धा ने आवाज लगाई उसका पुत्र अपनी मां के पास आ गया। अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को आश्चर्य हुआ और वह समझ गई कि ये कोई साधारण साधु नहीं हैं। तब हनुमानजी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और वृद्धा को आशीर्वाद दिया। बोलो बजरंगबली की जय! हर हर महादेव !

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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