Diwali Par Laxmi Ji Ki Aarti Karni Chahiye Ya Nahi: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के बाद आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरती पूजा को पूर्णता प्रदान करती है और भगवान की असीम कृपा दिलाती है। इस दिन माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा करने के बाद उनकी आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती को लेकर लोगों के कई अलग-अलग मत सामने आए हैं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती नहीं करनी चाहिए क्योंकि आरती तो तब की जाती है जब किसी को विदा करना हो और दिवाली का दिन तो मां लक्ष्मी के आगमन का होता है। ऐसे में उनकी आरती करने से वो घर से विदा हो सकती हैं। वहीं कई लोग ऐसा मानते हैं कि दिवाली की पूजा मां लक्ष्मी की आरती के बिना अधूरी रह जाती है इसलिए इस दिन आरती जरूर करनी चाहिए। चलिए जानते हैं क्या सही है क्या गलत।
दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती करें या नहीं?
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य सुजीत जी के अनुसार किसी भी देवी-देवता की आरती का तात्पर्य है उस पूजा की परिपूर्णता। यदि पूजा के विधि-विधान में हमसें कोई त्रुटि हो गई हो तो हम आरती के माध्यम से उस त्रुटि को दूर करके भगवान के प्रति अपना पूर्ण समर्पण दिखाते हैं। ये कहना कि आरती करने से भगवान विदा हो जाते हैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यदि ऐसा होता तो मंदिरों में निश्चित समय पर रोजाना आरती क्यों की जाती। किसी भी देवी-देवता की आरती करने से वह देवी-देवता उस स्थान से विदा नहीं होते बल्कि उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी जी की आरती भी जरूर करें क्योंकि आरती से लक्ष्मी जी विदा नहीं होंगी बल्कि वो और भी ज्यादा प्रसन्न हो जाएंगी। यहां इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि जिस अनुष्ठान के बाद देवी-देवता का विसर्जन करना होता है उनको मंत्रों के द्वारा पूरे विधि विधान से विसर्जित किया जाता है। ऐसे में दिवाली पर बिना किसी दुविधा के मां लक्ष्मी की आरती करें।
दिवाली लक्ष्मी जी की आरती का समय 2025
दिवाली पर लक्ष्मी जी की आरती का समय 21 अक्टूबर 2025 को शाम 05 बजकर 50 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में लक्ष्मी माता की विधि-विधान पूजा करने के बाद उनकी आरती जरूर करें।
दिवाली लक्ष्मी जी की आरती के लिरिक्स
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
- उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
- सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
- जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
- कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
- सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
- खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
- रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
- उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
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