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Garud Puran: मौत के बाद नहीं पहले ही तय हो जाता है व्यक्ति का अगला जन्म, गरुड़ पुराण में बताया है कैसे होता है पुनर्जन्म

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Apr 18, 2026 08:36 am IST,  Updated : Apr 18, 2026 08:36 am IST

Garud Puran: गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इंसान के कर्म, विचार और जीवन का अंतिम समय उसके अगले जन्म को कैसे प्रभावित करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार कुछ गंभीर पापों के लिए अलग-अलग दंड और अगला जन्म तय किया जाता है। जानिए कैसे निर्धारित होता है व्यक्ति का पुनर्जन्म।

Garud Puran- India TV Hindi
मौत के पहले कैसे तय हो जाता है अगला जन्म Image Source : FILE IMAGE

Garud Puran: गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म से जुड़े कई रहस्यों का वर्णन मिलता है। हिंदू धर्म में जीवन और मृत्यु को एक निरंतर चक्र माना गया है, जहां आत्मा एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है। इस गूढ़ विषय को समझाने के लिए गरुड़ पुराण को बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इंसान के कर्म ही उसके अगले जन्म और मिलने वाली सजा को तय करते हैं। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि अगला जन्म अचानक नहीं मिलता। मृत्यु के बाद आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है।

मृत्यु से पहले ही तय होता है अगला जन्म

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ जी के संवाद से यह साफ पता चलता है कि इंसान का अगला जन्म मृत्यु के बाद अचानक तय नहीं होता। बल्कि उसके जीवनभर के कर्म और अंतिम समय की सोच मिलकर पहले ही तय कर देते हैं कि उसे किस योनि में जन्म मिलेगा और किस तरह का जीवन मिलेगा।

धर्म का अपमान करने वालों की सजा

इस ग्रंथ में बताया गया है कि जो लोग धर्म, वेद और भगवान का मजाक उड़ाते हैं या पूरी तरह भोग विलास में डूबे रहते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद कड़ा दंड मिलता है। ऐसे लोगों को अगले जन्म में कुत्ते की योनि मिलने की बात कही गई है, जहां उन्हें अपमान और अभाव भरा जीवन जीना पड़ता है।

मित्र के साथ धोखा करने वालों का दंड

गरुड़ पुराण में मित्रता को बेहद पवित्र रिश्ता माना गया है। लेकिन जो लोग अपने स्वार्थ के लिए दोस्तों के साथ विश्वासघात करते हैं, उनके लिए सख्त सजा बताई गई है। ऐसे व्यक्ति को अगले जन्म में गिद्ध की योनि मिलती है, जो दूसरों के अवशेषों पर निर्भर रहता है और यह उसके लालच और विश्वासघात का प्रतीक माना जाता है।

दूसरों को छलने वालों की सजा

जो लोग झूठ बोलकर, धोखा देकर या चालाकी से दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें भी अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोगों को अगले जन्म में उल्लू की योनि मिलती है, जिसे अज्ञान और भ्रम का प्रतीक माना जाता है।

अंतिम समय की सोच का असर

इस ग्रंथ में यह भी बताया गया है कि इंसान के जीवन का आखिरी समय बहुत अहम होता है। अगर मृत्यु के समय मन शांत और ईश्वर में लगा हो, तो बेहतर जन्म मिलता है। वहीं लालच, क्रोध या नकारात्मक सोच के साथ मृत्यु होने पर आत्मा को निचली योनियों में जाना पड़ता है।

84 लाख योनियों का रहस्य

गरुड़ पुराण में यह बताया गया है कि आत्मा को शरीर छोड़ने के बाद अपने कर्मों का पूरा हिसाब देना पड़ता है। गरुड़ पुराण में 84 लाख योनियों का जिक्र मिलता है, जिनमें मनुष्य जीवन को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। अच्छे कर्म करने पर आत्मा को उच्च जन्म मिलता है, जबकि बुरे कर्म करने वालों को निचले स्तर के जीवन में जाना पड़ता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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