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इसलिए कैलाश पर्वत है अभेद्य, इस पर चढ़ाई की कोशिश करने वाले पर्वतारोहियों के ये विचित्र अनुभव आपको भी चौंका देंगे

Written By: Naveen Khantwal Published : May 03, 2025 10:26 am IST, Updated : May 05, 2025 12:39 pm IST

कैलाश पर्वत को अभेद्य माना जाता है। इस पर्वत पर कई पर्वतारोहियों ने चढ़ने की कोशिश की लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया। कई पर्वतारोहियों ने अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा भी किए हैं, इन्हीं के बारे में आज हम आपको बताएंगे।

Kailash Parvat- India TV Hindi
Image Source : META AI कैलाश पर्वत

पृथ्वी पर अनगिनत पर्वत हैं, जिनमें से लगभग हर पर्वत को इंसान ने फतह कर लिया है। दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रेणी  एवरेस्ट पर भी इंसान ने विजय प्राप्त कर लिए हैं। ऐवरेस्ट पर्वत 29,000 फीट ऊंचा है जिस पर सैकड़ों लोग चढ़ाई कर चुके हैं लेकिन कैलाश एक ऐसा पर्वत है जो केवल 22,000 फीट ऊंचा है, फिर भी आज तक कोई इस पर चढ़ाई नहीं कर पाया। इसके पीछे का एक कारण ये भी है कि साल 2001 में चीन ने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। यह प्रतिबंध धार्मिक संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू किया गया। 

 

कैलाश पर्वत न केवल अपनी भौगोलिक संरचना के लिए बल्कि अपनी आध्यात्मिक, रहस्यमयी ताकतों के लिए भी जाना जाता है। हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लोग हर वर्ष इस पर्वत के दर्शनों के लिए जाते हैं। साल 2025 में 30 जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होगी। 

कैलाश पर्वत पर चढ़ाई की कोशिशें और असफलताएं

कई पर्वतारोहियों ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की है, लेकिन हर प्रयास असफल ही रहा। 2007 में रूसी पर्वतारोही सर्गे सिस्टिकोव ने अपनी टीम के साथ मिलकर कैलाश पर चढ़ने का असफल प्रयास किया था। कुछ ऊंचाई तक तो सर्गे और उनकी टीम पहुंच गई लेकिन जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ने लगी सर्गे और उनकी पूरी टीम को भयंकर सिरदर्द होने लगा, मांसपेशियों में ऐंठन और सांस की तकलीफ़ से वो जूझने लगे। सर्गे के अनुसार, “मुझे महसूस हुआ कि यह पर्वत मुझे स्वीकार नहीं कर रहा। मैंने चढ़ना बंद कर नीचे उतरना ही बेहतर समझा।” हालांकि ये नहीं पता लग सका कि सर्गे की ये यात्रा अधिकृत थी या अनधिकृत थी क्योंकि कैलाश पर चढ़ने पर तो चीन ने साल 2001 में ही रोक लगा दी थी।

एक अन्य पर्वतारोही कर्नल विल्सन ने कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार अचानक मौसम बिगड़ जाता और उन्हें लौटना पड़ता। इस तरह की घटनाओं ने कैलाश को एक ‘दैवीय संरक्षित क्षेत्र’ का दर्जा दिला दिया है।

कैलाश पर्वत की चढ़ाई करने वालों के अनुभव

कैलाश पर्वत की सर्गे सिस्टिकोव, कर्नल विल्सन की टीम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कैलाश के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि-

  • यहां बाल और नाखून असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने लगते हैं।
  • कुछ पर्वतारोहियों ने यहाँ समय का विचलन महसूस किया और कहा कि समय यहां तेज़ी से गुजर रहा है ऐसा महसूस होता है।
  • शरीर पर बढ़ती उम्र के लक्षण अचानक प्रकट होने लगते हैं चेहरे पर झुर्रियाँ और थकावट दिखने लगती है।
  • यहां की हवा में एक अनकही शक्ति है जो मन और शरीर को असहज महसूस करने पर मजबूर कर देती है।

चीन की पहल का हुआ वैश्विक विरोध

कुछ समय पहले चीन सरकार ने कैलाश पर चढ़ने के लिए पर्वतारोहियों की एक विशेष टीम तैयार की थी, लेकिन जैसे ही यह खबर बाहर आई, दुनिया भर के आध्यात्मिक और धार्मिक समुदायों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। लोगों ने इसे भगवान शिव के निवास में हस्तक्षेप मानते हुए, इसे अपवित्र करने का प्रयास कहा। अंततः चीन को इस योजना को स्थगित करना पड़ा और कैलाश को ‘नो-क्लाइंब जोन’ घोषित करना पड़ा।

 

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