नई दिल्ली: मैदान से बाहर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर क्रिकेटर गौतम गंभीर का मानना है क्रिकेट खिलाड़ियों के जीवन पर फिल्में नहीं बननी चाहिए, बल्कि सेना के जवानों पर फिल्में बनाना बेहतर रहेगा। उनका कहना है कि उनके जीवन पर फिल्में बननी चाहिए जिन्होंने देश के कल्याण के लिए कुछ योगदान दिया हो। गंभीर के इस बयान के बाद बवाल हो सकता है क्योंकि 30 सितंबर को भारतीय वनडे और टी20 टीम के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी के जीवन के जीवन पर बनी फिल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ रिलीज होने वाली है।
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गंभीर ने रविवार को ट्वीट किया, ‘मैं क्रिकेट खिलाड़ियों के जीवन पर फिल्म के पक्ष में नहीं हूं। मेरे खयाल से देश के कल्याण के लिए जिन लोगों ने योगदान दिए हैं उनके जीवन पर फिल्में बननी चाहिए।’ एक और ट्वीट में गंभीर ने कहा, ‘देश में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने देश के लिए अच्छे काम किए। इसलिए उनके जीवन पर फिल्में बननी चाहिए।’
एक और ट्वीट में उरी हमले में शहीद 17 शहीदों के ऊपर फिल्म बनाने का पक्ष लिया है। उन्होंने लिखा है, 'किसी क्रिकेटर की बजाय इन 17 शहीदों का किसी फिल्म पर ज्यादा हक बनता है। इससे बड़ी प्रेरणा कोई हो ही नहीं सकती कि एक युवा व्यक्ति अपनी जान देश पर कुर्बान कर दे।'
कई लोगों का मानना है कि गंभीर ने यह टिप्पणी महेंद्र सिंह धोनी की फिल्म को लेकर की है। यदि ऐसा है तो दोनों खिलाड़ियों के बीच की खटास साफ जाहिर हो जाती है। दलीप ट्रॉफी सहित घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद गौतम गंभीर को न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए टीम में वापस नहीं बुलाया गया है।
हालांकि एक ट्वीट में उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद किसी खास क्रिकेटर को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने लिखा, 'मेरे आलोचकों ने इसे गलत समझ लिया। मैं किसी 'खास' क्रिकेटर की बायॉपिक के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि मैं इस कॉन्सेप्ट के ही खिलाफ हूं जिसमें मेरे जीवन पर बनने वाली बायॉपिक भी शामिल है।'