बेंगलुरू: आस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ के दूसरे मैच के पहले दिन शनिवार को भारत के लिए 90 रनों की पारी खेलने वाले सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल ने इसे अपने टेस्ट करियर की सबसे कठिन पारी बताया है। राहुल की इस संघर्षभरी पारी के बल पर भारतीय टीम पहली पारी में 189 रन बना सकी। राहुल ने 205 गेंदों का सामना करते हुए नौ चौके लगाए और नौवें विकेट के तौर पर पवेलियन लौटे।
दिन का खेल समाप्त होने के बाद राहुल ने कहा, "विकेट आसान नहीं था। यह मेरे अब तक के टेस्ट करियर का सबसे कठिन पारी थी।" राहुल ने कहा, "यह चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मैंने इस चुनौती का लुत्फ उठाया। टीम चाहती थी कि मैं जितना अधिक समय टिक सकूं टिकूं और जितना हो सके रन बटोरूं। मुझे यही भूमिका और जिम्मेदारी दी गई थी, इसलिए मैंने अपनी पूरी योग्यता का इस्तेमाल किया।"
उन्होंने आगे कहा, "यह मेरा घरेलू मैदान है और इस तरह के विकेट पर मैं पहले भी खेल चुका हूं। मुझे थोड़ा आभास था कि इस तरह के विकेट पर कैसे खेला जाता है। मैंने खराब गेंदों को छोड़ने और अच्छी गेंदों को सम्मान देने की कोशिश की। मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं।"
कप्तान विराट कोहली का विकेट गिरने के बाद खेल के प्रति रवैये में बदलाव को लेकर राहुल ने कहा कि वह गेंदबाजों को थकाना चाहते थे, हालांकि ऐसा हो नहीं सका क्योंकि भारत लगातार अंतराल पर विकेट गंवाता रहा।
उन्होंने कहा, "एक सलामी बल्लेबाज के लिए जरूरी है कि वह स्पिन गेंदबाजों को लय हासिल न करने दे और पिछले 6-8 महीनों से मैं यही करने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन चूंकि यह विकेट थोड़ा धीमा और उछालभरा है, मुझे लगा कि यदि में स्वीप शॉट खेलता हूं तो गेंद मेरे बल्ले का ऊपरी किनारा ले सकती है।"