वनडे क्रिकेट हो या फिर कोई और फॉर्मेट। अक्सर आपने देखा होगा कि जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा रन बनाए हों या फिर सबसे ज्यादा विकेट लिए हों, उसे मैच के बाद प्लेयर ऑफ द मैच का अवार्ड दिया जाता है। लेकिन क्या हो कि हम आपसे कहें कि एक बार ऐसा भी हुआ है, जब उस खिलाड़ी को ये अवार्ड दे दिया गया, जिसने ना तो एक भी रन बनाया और ना ही कोई विकेट लिया। यहां तक कि कैच भी नहीं लपका। ये कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। साल 2001 में ही ऐसा हुआ था। चलिए आपको बताते हैं कि वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट का ये अनोखा और अलबेला रिकॉर्ड कब बन गया।
साल 2001 में जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था मुकाबला
साल 2001 में जून का महीना। हरारे क्रिकेट स्टेडियम में वेस्टइंडीज ओर जिम्बाब्वे की टीमें आमने सामने थीं। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 266 रन बनाए थे। सलामी बल्लेबाज डेरेन गंगा ने 66 रन बनाए। वहीं क्रिस गेल के बल्ले से 53 रनों की पारी आई। शिवनारायण चंद्रपॉल ने भी 51 रनों की पारी खेली। बाकी कोई बल्लेबाज 50 का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। उस वक्त के हिसाब से ये वनडे का ठीकठाक स्कोर था। ये हासिल किया जा सकता था।
वेस्टइंडीज ने 27 रन से जीत लिया मुकाबला
इसके बाद जब जिम्बाब्वे की टीम इस लक्ष्य का पीछा करने के लिए उतरी तो सलामी बल्लेबाज एलिस्टर कैंपबेल ने 68 रनों की बेहतरीन पारी खेली। उनके अलावा और कोई बल्लेबाज ज्यादा रन नहीं बना पाया। जिम्बाब्वे की टीम 50 ओवर में 9 विकेट पर 239 रन ही बना सकी। इस तरह से वेस्टइंडीज ने बड़ी आसानी से 27 रन से मैच अपने नाम किया। वेस्टइंडीज की ओर से मार्विन ढिल्लन ने तीन विकेट चटकाए। लेकिन उस वक्त सभी लोग चौंक गए, जब प्लेयर ऑफ द मैच का ऐलान किया गया। ये अवार्ड कैमरून कॉफी को दिया गया।
कैमरून कॉफी ने क्या किया, जो मिला ये अवार्ड
कैमरून कॉफी की बैटिंग नहीं आई, क्योंकि वे गेंदबाज हैं और वेस्टइंडीज के 5 ही विकेट गिरे थे। लेकिन गेंदबाजी की, हालांकि उन्हें कोई भी विकेट नहीं मिला। लेकिन उन्हें फिर मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी क्यों घोषित किया गया। इसका जवाब है किफायती गेंदबाजी। कैमरून कॉफी ने 10 ओवर में केवल 20 रन खर्च किए। उनके दो ओवर तो मेडन गए, जिसमें कोई रन गया ही नहीं। मार्विन ढिल्लन ने भले ही तीन विकेट लिए हों, लेकिन उन्होंने 10 ओवर में 48 रन दे दिए थे, जो उस वक्त काफी ज्यादा माने जाते थे। इतना ही नहीं कैमरून कॉफी ने कोई कैच भी नहीं लिया। यानी उन्हें ये अवार्ड विशुद्ध रूप स कम रन देकर ओवर करने को लेकर दिया गया था। उस वक्त ये मैच और कैमरून कॉफी खूब चर्चा में रहे थे।
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