Grok Facing Backlash: एलन मस्क के एआई चैटबॉट ग्रोक को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुई सामूहिक गोलीबारी के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी फैला रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी बॉन्डी बीच गोलीबारी में कुल 16 लोगों की मौत हो गई है। इस अटैक में 2 हमलावर पिता-पुत्र में से पिता को पुलिस ने मौके पर ही मार डाला जबकि बेटे का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना को लेकर जहां दुनियाभर में लोग ऑनलाइन जानकारी सर्च कर रहे थे वहीं एलन मस्क के एआई चैटबॉट ग्रोक पर ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच गोलीबारी के बारे में गलत जानकारी फैलाने के बाद सवाल उठने लगे। ग्रोक पर सिडनी बीच पर बंदूकधारी को निहत्था करने वाले शख्स की गलत पहचान करने और ऑथेंटिक वीडियो पर सवाल उठाने जैसे आरोप लगाए गए और यूजर्स इसकी आलोचना कर रहे हैं।
ग्रोक को मस्क की एआई कंपनी xAI ने बनाया है और इसका व्यापक रूप से उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उपयोग किया जाता है। बॉन्डी बीच गोलीबारी की खबर ऑनलाइन फैलने के तुरंत बाद यूजर्स ने ग्रोक से घटना के बारे में सवाल पूछना शुरू कर दिया। यहीं से समस्याएं शुरू हुईं।
Gizmodo की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रोक ने घटना के बारे में कई महत्वपूर्ण फैक्ट्स को बार-बार गलत बताया। खासकर उस व्यक्ति के बारे में जिसने हमलावर को रोकने में मदद की। 43 साल के अहमद अल अहमद जो एक राहगीर थे, को वीडियो में एक बंदूकधारी का सामना करते और उसे निहत्था करते हुए दिखाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर तारीफें मिलीं। हालांकि ग्रोक कई बार उनकी सही पहचान करने में असफल रहा।
एक बार तो चैटबॉट ने तस्वीर में दिख रहे शख्स को गलती से इजरायली बंधक बता दिया। एक और जवाब में इसने सवाल उठाया कि क्या अल अहमद की हरकतों को दिखाने वाले व्यापक रूप से साझा किए गए वीडियो और तस्वीरें रियल भी थे। कई बार ग्रोक ने पूरी तरह से ऐसे विषयों को भी शामिल कर लिया जिनका ऑस्ट्रेलिया में हुई गोलीबारी से कोई लेना-देना नहीं था। इसमें इजरायली सेना और फिलिस्तीनियों को लेकर उसके बिहेवियर के बारे में कमेंट्स शामिल थे।
एक और गलत जवाब में ग्रोक ने दावा किया कि बंदूकधारी को निहत्था करने वाला व्यक्ति वास्तव में एडवर्ड क्रैबट्री नाम का एक शख्स था और इन्हें 43 साल के आईटी प्रोफेशनलर और सीनियर सॉल्यूशंस आर्किेटेक्ट बताया गया था। यह जानकारी गलत साबित हुई। बाद में ग्रोक ने खुद माना कि यह भ्रम वायरल पोस्ट और गैर भरोसेमंद ऑनलाइन आर्टिकल्स से पैदा हो सकता है जिसमें शायद खराब रखरखाव वाली न्यूज वेबसाइटों पर एआई से तैयार किया गया मैटीरियल भी शामिल है।
इस घटना ने एक बार फिर से इस सवाल को जन्म दिया है कि ब्रेकिंग न्यूज जैसी घटनाओं के दौरान एआई चैटबॉट कितने भरोसेमंद होते हैं। जब जानकारी अभी भी सामने आ रही होती है, तो छोटी-छोटी गलतियां भी तेजी से फैल सकती हैं और भ्रम पैदा कर सकती हैं।
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