"चीन का इस आतंकवादी को ब्लैकलिस्ट करने के लिए सहयोग से इनकार करना मोदी सरकार की झूला कूटनीति की विफलता का बेहतरीन उदाहरण है।"
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर जनवरी 1994 में जब पहली बार भारत आया था तो वह राजधानी के संभ्रांत इलाके चाणक्यपुरी इलाके में स्थित एक होटल में ठहरा था।
नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि भाजपा आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा नहीं कर सकती है क्योंकि मसूद अजहर के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
आतंकी गुट जैश ए मुहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के मामले में चीन के वीटो के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा ने सवाल किया कि जब आतंकवाद पर समग्र राष्ट्र को पीड़ा होती है तो आपको खुशी क्यों होती है?
‘‘यदि चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। ’’
कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा ने आज कहा कि आपकी विरासत के कारण ही चीन सुरक्षा परिषद का सदस्य है।
बाबा रामदेव ने अपने ट्विटर हेंडल पर लिखा ’’#मसूदअजहर समर्थक #China सहित जो भी देश और देश के अंदर लोग हैं उनका हमें राजनैतिक, सामाजिक. आर्थिक तौर पर बहिष्कार करना चाहिए, चीन तो विशुद्ध रूप से व्यवसायिक भाषा ही समझता है, आर्थिक बहिष्कार युद्ध से ज्यादा ताकतवर है।’’
भाजपा ने अपने ट्विटर हेंडल के जरिए राहुल गांधी के आरोप का जवाब देते हुए लिखा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की कीमत पर आपके पर परदादा ने चीन को ‘गिफ्ट’ देकर स्थाई सदस्यता दिलाई थी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से डरे हुए हैं और चीन के खिलाफ उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता है।
मतलब 50 साल के मसूद अज़हर को कोई बीमारी नहीं है। पाकिस्तानी हुकुमत और उसकी सेना इसे खिलाती-पिलाती है और आतंक की फैक्ट्री चलाने के लिए अपनी ज़मीन देती है क्योंकि इन्हीं दहशतगर्दों के रहमोकरम पर पाकिस्तान ख़ुद भी पलता है।
सुषमा स्वराज ने कहा कि पुलवामा अटैक के बाद पूरी दुनिया मान रही है कि इसके लिए कोई और नहीं मसूद अजहर जिम्मेदार है लेकिन पाकिस्तान इसे मानने को तैयार ही नहीं है।
सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने चीन को चेतावनी दे दी है। चीन से कहा गया है कि अगर वो मसूद अज़हर को लेकर अपने रुख को नहीं बदलेगा तो दूसरी कार्रवाई के विकल्प खुले हैं।
चीन भले ही खुद को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाने की तरफ आगे बढ़ रहा हो, भले ही चीन अपनी आर्थिक ताकत का डंका पीटने में लगा हो लेकिन सच ये है कि उसकी ये ताकत दुनिया के आतंकियों की मोहताज बन गई है।
मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की भारत की कोशिशों को झटका लगा है। चीन ने मसूद के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया जिसके बाद यूएन में मसूद के खिलाफ प्रस्ताव गिर गया है।
अगर राहुल गांधी उस दहशतगर्द का सम्मान करेंगे जिसके लोगों ने हमारे 40 जवानों को शहीद कर दिया तो देश के लोग शायद इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की शक्ति रखनेवाला सदस्य है और सबकी निगाहें चीन पर हैं जो पूर्व में अजहर को संयुक्त राष्ट्र से वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत के प्रयासों में अड़ंगा डाल चुका है।
अमेरिका ने कहा है कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार है और ऐसा नहीं किया जाना क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरा होगा।
जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद पर फैसले में सबसे बड़ा अड़ंगा चीन लगाता रहा है। इससे पहले कम से कम तीन बार चीन मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने और उस पर बैन लगाने की कोशिशों पर ब्रेक लगा चुका है।
राहुल गांधी ने सोमवार को पुलवामा हमले को लेकर मोदी और बीजेपी को घेरने की कोशिश की लेकिन खुद ही घिर गए।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को रिहा करने में कांग्रेस ने भी वाजपेयी सरकार का साथ दिया था।
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