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यूपी का पहला 'जीरो फ्रेश वेस्ट डंप' शहर बना लखनऊ, जानें कैसे रच दिया ये इतिहास

 Published : Feb 05, 2026 10:25 pm IST,  Updated : Feb 05, 2026 10:25 pm IST

लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर बन गया है। यहां रोजाना निकलने वाले लगभग 2000 मीट्रिक टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है। शहर में जैविक कचरे से खाद व बायोगैस और अजैविक कचरे से RDF बनाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Lucknow zero fresh waste dump, Uttar Pradesh waste management- India TV Hindi
लखनऊ ने उत्तर प्रदेश का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर बनकर इतिहास रच दिया है। Image Source : X.COM/AWASTHIAWANISHK

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। अब यह यूपी का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां रोजाना पैदा होने वाला सारा ताजा कचरा यानी कि फ्रेश वेस्ट पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि अब शहर में कोई भी ताजा कचरा खुले में डंप नहीं किया जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ लखनऊ को 'जीरो फ्रेश वेस्ट डंप' शहर का खिताब मिला है।

'लखनऊ ने इतिहास रच दिया है'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए एक ट्वीट में लिखा, 'लखनऊ ने इतिहास रच दिया है। यह उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जहां जीरो फ्रेश वेस्ट डंपिंग हो रही है! 100% वैज्ञानिक कचरा प्रोसेसिंग के साथ यह शहर स्मार्ट शहरी प्रबंधन में नया मानक स्थापित कर रहा है। स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ लखनऊ की दिशा में एक मजबूत कदम।' बता दें कि लखनऊ में हर रोज करीब 2000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है।

कचरा संभाल रहे हैं 3 बड़े प्लांट

लखनऊ से निकले कचरे को संभालने के लिए लखनऊ नगर निगम ने भूमि ग्रीन एनर्जी के साथ मिलकर 3 बड़े प्लांट लगाए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2100 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इन प्लांटों में कचरे को पहले जैविक (लगभग 55 प्रतिशत) और अजैविक (लगभग 45 प्रतिशत) हिस्सों में अलग किया जाता है। जैविक कचरे से खाद और बायोगैस बनाई जा रही है। अजैविक कचरे को रिसाइकल किया जाता है या फिर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) में बदलकर सीमेंट और पेपर उद्योगों में भेजा जाता है, जहां इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पुराना कचरा भी है बड़ी मात्रा में

बता दें कि लखनऊ में करीब 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा भी था जिसमें से 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा हो चुका है। इससे निकले RDF, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) कचरा, बायो-सॉयल और मोटे अंशों का पर्यावरण के अनुकूल इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन RDF विभिन्न उद्योगों को भेजा जा चुका है। मोटा अंश, बायो-सॉयल और C&D कचरे का उपयोग निचले इलाकों को भरने और बुनियादी ढांचे के विकास में किया गया है।

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