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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर रखा गया 'आम' का नाम, जानिए क्या है इसके पीछे की खास वजह?

 Published : Jun 06, 2025 12:43 pm IST,  Updated : Jun 06, 2025 12:50 pm IST

लखनऊ के मलीहाबाद के आम देश ही नहीं पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। मलीहाबाद के आम अपने-अपने नए वैराइटी के लिए भी जाने जाते हैं। इसमें एक नई वैराइटी भी जुड़ गई है। इसका नाम राजनाथ आम रखा गया है।

राजनाथ आम- India TV Hindi
राजनाथ आम Image Source : ANI

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलीहाबाद के रहने वाले बागवान एवं 'पद्मश्री' से सम्मानित कलीमुल्लाह खान 'मैंगो मैन' के नाम से मशहूर हैं। खान ने आम की एक नव विकसित किस्म का नाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर रखा है। कलीमुल्लाह खान ने मलीहाबाद में अपने बाग में ‘ग्राफ्टिंग’ तकनीक से तैयार की गई आम की नई किस्म का नाम रक्षा मंत्री के नाम पर रखा है। इस किस्म को 'राजनाथ आम' कहा जाएगा। 

दो पौधों को जोड़कर बनाया एक नया पौधा

‘ग्राफ्टिंग’ बागवानी की ऐसी तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा बनाया जाता है। बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और समर्पण के लिए पद्मश्री से नवाजे गए खान इससे पहले नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सचिन तेंदुलकर, ऐश्वर्या राय, अखिलेश यादव और सोनिया गांधी समेत कई प्रमुख भारतीय हस्तियों के नाम पर आम की किस्मों का नाम रख चुके हैं। 

राजनाथ आम नाम रखने की बताई वजह

कलीमुल्लाह खान ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, 'मैं अपने आमों का नाम उन लोगों के नाम पर रखता हूं, जिन्होंने सच्चे मायनों में देश की सेवा की है। मैं चाहता हूं कि ये नाम पीढ़ियों तक जिंदा रहें। कई बार लोग महान नेताओं को भूल जाते हैं, लेकिन अगर कोई आम उन्हें राजनाथ सिंह के अच्छे काम की याद दिलाता है तो यह सार्थक है। वह एक संतुलित और विचारशील व्यक्ति हैं। हाल ही में पाकिस्तान के बारे में एक चर्चा के दौरान मैंने महसूस किया कि वह युद्ध नहीं बल्कि शांति चाहते हैं।' 

कलीमुल्लाह खान
Image Source : FILE PHOTO-ANIकलीमुल्लाह खान

युद्ध सिर्फ नफरत को बढ़ाता है

खान ने पहलगाम आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘पाकिस्तान ने आक्रमण की शुरुआत की लेकिन आज, माहौल बेहतर हो गया है। जंग नहीं बल्कि अमन ही समाधान है। समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए। युद्ध सिर्फ नफरत को बढ़ाता है और सभी का नुकसान होता है।' 

अब तक 300 से अधिक आम की किस्में विकसित की

खान ने अपने दशहरी और अन्य किस्म के आमों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर मलीहाबाद क्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि 1919 के आसपास इस क्षेत्र में आम की 1,300 से ज्यादा किस्म थीं। उन्होंने कहा, 'वक्त के साथ कई किस्में बाजार से गायब हो गईं। मैं उन्हें संरक्षित करने और पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहा हूं। मैंने अब तक 300 से अधिक किस्में विकसित की हैं।'

आम की विभिन्न किस्मों का जायका लेते रहें लोग

कलीमुल्लाह खान ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि मेरे जाने के बाद भी लोग आम की विभिन्न किस्मों का जायका लेते रहें। आम दुनिया के उन कुछ फलों में से एक है जो लोगों को स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है।' खान ने कहा कि उन्होंने विभिन्न स्थानों पर आम के औषधीय लाभों के प्रमाण पेश किए हैं और अब यह देखना होगा कि शोध संस्थान इन निष्कर्षों को कितनी दूर तक ले जा सकते हैं तथा उन्हें कैसे वास्तविक वैज्ञानिक प्रगति में बदल सकते हैं। (भाषा के इनपुट के साथ)

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