श्रावस्ती: बनारस के बाद अब श्रावस्ती में भी रोजा इफ्तारी को लेकर विवाद सामने आया है। यहां बाबा सोन पथरी आश्रम के पास एक मंदिर भी मौजूद है। इस मंदिर के पास कुछ मुस्लिम युवकों ने मांसाहार रोजा इफ्तार पार्टी आयोजित की। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि मुस्लिम युवकों ने इफ्तारी करने के बाद मांस के अवशेष पास में मौजूद एक झील में फेंक दिए। इस झील के पानी का उपयोग मंदिर की सफाई से लेकर खाना बनाने और मूर्तियों की सफाई तक में किया जाता है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद अब स्थानीय लोगों में आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।
मंदिर के पास की इफ्तार पार्टी
दरअसल, पूरा मामला सिरसिया थाना क्षेत्र के भारत नेपाल सीमा की पहाड़ी पर स्थित सोन पथरी मंदिर का है। यहां सोन पथरी मंदिर और बाबा के आश्रम के पास कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के आखिरी दिन रोजा इफ्तार पार्टी करने के लिए पहुंचे थे। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें करीब डेढ़ दर्जन लोग रोजा इफ्तार करते नजर रहे हैं। सोनपथरी मंदिर के पास इन्होंने मांसाहारी भोजन किया और उसके अवशेष झील में फेंक दिए, जिससे मन्दिर का भोजन भी बनता है।
मंदिर के काम में इस्तेमाल होता है झील का पानी
बता दें कि सोन पथरी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा करने पहुंचते हैं। यहां पर कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। इस बीच ऐसा वीडियो आने के बाद लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है। लोगों ने नाराजगी भी जताई है। वहीं हिंदू संगठनों ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। मंदिर के पंडित शरणानन्द महराज की तहरीर पर और वायरल वीडियो को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जमाल, इरफान, इमरान और जहीर को गिरफ्तार किया। हालांकि बाद में सभी आरोपियों को SDM कोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही सोशल मीडिया पर गुस्से का ज्वालामुखी फट पड़ा। अब स्थानीय लोग इस आरोपियों पर NSA लगाने तक की मांग कर रहे हैं।
आरोपियों को पुलिस ने जमानत पर छोड़ा
इस घटना को लेकर सीओ सतीश कुमार ने कहा कि आश्रम के शरणानंद महाराज की तहरीर में बताया गया कि कुछ लोग वहां रोजा इफ्तार की पार्टी कर रहे थे और मांसाहारी भोजन का इस्तेमाल कर रहे थे। ये लोग इफ्तार के बाद मांसाहार के अवशेष उस झील में डाल रहे थे, जहां से मंदिर के लिए खाना बनाने के लिए पानी जाता है। इस पर कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। हालांकि बाद में आरोपियों को छोड़े जाने को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि ये कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। आस्था से जुड़े इतने बड़े विवाद को यूं ही ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। (इनपुट- बच्चे भारती)
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