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जनवरी में ही रुक जाती चढ़ावा चोरी, CA ने 6 महीने पहले बता दिया था; फिर चंपत राय ने क्यों नहीं रोका?

 Published : Jul 02, 2026 05:10 pm IST,  Updated : Jul 02, 2026 06:54 pm IST

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लोगों को जनवरी में ही चढ़ावे में चोरी का शक हो गया था। CA ने ट्रस्ट के मेंबर्स को जानकारी दी कि राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में अचानक काफी गिरावट आ रही है।

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चंपत राय Image Source : PTI

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी केस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अगर चंपत राय चाहते तो ये चोरी जून में नहीं बल्कि 6 महीने पहले जनवरी में ही रुक जाती। दरअसल, ट्रस्ट के लोगों को जनवरी में ही चढ़ावे में चोरी का शक हो गया था क्योंकि पिछले साल के आखिर में अचानक चढ़ावे की रकम में काफी गिरावट आ गई थी।

जनवरी में कैसे रुक सकती थी चढ़ावा चोरी?

  1. असल में हर महीने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का ऑडिट करता है। इसी CA ने ट्रस्ट के मेंबर्स को जानकारी दी कि राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में अचानक काफी गिरावट आ रही है। चढ़ावे के वाउचर और रसीदों में कोई तालमेल नहीं है। पांच लाख से ऊपर के खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा है।
  2. CA के बताने के बाद ट्रस्ट की तरफ से महासचिव चंपत राय को चिट्टी लिखी गई। चंपत राय को सुझाव दिया गया कि वो पूरे खातों की ठीक से जांच कराएं। चढ़ावे की देख-रेख के लिए तुरंत ही एक डिपार्टमेंट हेड अपॉइंट करें।
  3. चंपत राय से कहा गया कि चढ़ावे में जो फॉरेन करेंसी आ रही है, उसकी ठीक से एंट्री नहीं हो रही है। फॉरेन करेंसी के हिसाब किताब के लिए भी, अलग से एक आदमी रखा जाए। गिनती करने वाले स्टाफ के ड्रेस कोड और फ्रिस्किंग को लेकर जो SOP बनाए गए हैं, उनका सख्ती से पालन हो।
  4. चंपत राय से ये भी कहा गया कि मंदिर के काम के लिए जो ठेके मनमर्ज़ी से दिए जा रहे हैं, वो ठीक नहीं हैं। प्रॉपर टेंडर निकाला जाए, कोटेशन मंगाया जाए लेकिन, ये चिट्ठी मिलने के बाद चंपत राय बुरा मान गए। उन्होंने सुधार करने की जगह, नया हेड अपॉइंट करने की जगह शिकायत शुरू कर दी। नतीजा ये हुआ कि कोई सिस्टम बना नहीं, किसी आदमी का अपॉइंटमेंट नहीं हुआ।
  5. जनवरी से लेकर मई तक का समय ऐसे ही निकल गया। चोरी का शक तब और गहराया जब मई में चढ़ावे की रक़म और कम हो गई। इसके बाद ट्रस्ट के एक पावरफुल शख्सियत के जिद करने पर काउंटिंग सेंटर के अंदर एक स्पाई कैम लगाया गया। इसकी जानकारी ट्रस्ट के गिने चुने लोगों को ही दी गई। नोट गिनने वालों से छुपाकर ये काम किया गया।
  6. स्पाई कैम लगाने के बाद 24 घंटे काउंटिंग रूम की रिकॉर्डिंग हुई तो सारा सच सामने आ गया। काउंटिग के वक्त लोग जेबों में नोट भरते दिखाई दिए। ट्रस्ट के सामने चोरी का ये केस 6 और 7 जून के बीच आया, उससे पहले चंपत राय चोरी होते देखकर चोरों से रकम बरामद करने में जुट गए थे।

अविनाश शुक्ला के भाई का नोटों के बंडल के साथ वीडियो वायरल

वहीं, चढावा चोरी मामले में आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ करने के लिए पुलिस आज अपने रिमांड में ले सकती है। बताया जा रहा है इसलिए अयोध्या पुलिस ने अदालत में अर्जी भी दाखिल की है। उधर, अविनाश शुक्ला के भाई का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो हाथों में नोटों का बंडल लिए दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि ये वीडियो करीब एक साल पुराना है। अगस्त 2025 का वीडियो बताया जा रहा है।

अविनाश शुक्ला के पास मिले 20 लाख रुपये कैश

आपको बता दें कि अविनाश शुक्ला के योगा सेंटर से लोहे का एक संदूक मिला था, जिसपर  रामराज्य कोष लिखा था। चढ़ावा चोरों के पास से अब तक 80 लाख से ज्यादा की रकम रिकवर हो चुकी है जिसमें सबसे ज्यादा अविनाश शुक्ला के पास से ही मिला है। अविनाश शुक्ला के पास से 20 लाख रुपये कैश मिले हैं और अब उसके भाई की वो रील सामने आई है जिसमें वो हाथों में नोटों का बंडल लिए दिख रहा है। सोचिए 20 हजार का महीना कमाने के वाले के पास इतने पैसे कहां से आए। उसके भाई के पास इतने कैश कहां से आए।

अब इसी मामले में पूछताछ के लिए अयोध्या पुलिस को अविनाश की 24 घंटे की कस्टडी रिमांड मिली है। पुलिस ने अविनाश की 48 घंटे की रिमांड मांगी थी।

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