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बैंक में जमा रकम कहां से आई? जवाब नहीं दे पाए राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस के आरोपी

 Published : Jul 02, 2026 07:09 am IST,  Updated : Jul 02, 2026 07:09 am IST

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में SIT ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों में जमा बड़ी रकम का स्रोत नहीं बता सके। जांच में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आई है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft, Ram Temple Donation Scam- India TV Hindi
बैंक खाते आरोपियों की सारी पोल खोल रहे हैं। Image Source : INDIA TV

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस और SIT की जांच में पता चला है कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई बात नहीं थी, बल्कि यह लंबे समय से चल रही थी। साथ ही आरोपी पूछताछ के दौरान इस बात का जवाब ही नहीं दे पाए कि उनके बैंक खातों में जमा रकम का स्रोत क्या है। हालांकि, जांच एजेंसी को केवल पिछले 45 दिनों का CCTV फुटेज ही मिल सका, जिसके आधार पर 8 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

चोरी की रकम का कहां हुआ इस्तेमाल?

जांच के दौरान पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल या तो बैंक खातों में जमा करने के लिए किया गया या फिर उससे प्रॉपर्टी खरीदी गई। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि आरोपी अपने बैंक खातों में जमा बड़ी रकम का कोई संतोषजनक स्रोत नहीं बता पा रहे हैं। पुलिस अब बैंक लेन-देन के आधार पर उनसे लगातार पूछताछ कर रही है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft, Ram Temple Donation Scam
Image Source : PTIपुलिस की गिरफ्त में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी।

महाकुंभ के बाद बढ़ी चोरी की रकम

जांच में यह भी सामने आया है कि पहले चढ़ावे में अपेक्षाकृत कम रकम की चोरी होती थी, लेकिन प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान और उसके बाद मंदिर में चढ़ावे की राशि कई गुना बढ़ गई। इसी के साथ आरोपियों ने भी बड़ी रकम पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया। प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक हुआ था। महाकुंभ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीधे अयोध्या पहुंचे थे और रामलला के दर्शन किए थे। इस दौरान अयोध्या में भारी भीड़ उमड़ी और राम मंदिर में रिकॉर्ड स्तर पर चढ़ावा आया था।

बैंक रिकॉर्ड बने सबसे बड़ा आधार

SIT के पास उपलब्ध 45 दिनों के CCTV फुटेज में चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई हैं। इन्हीं फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई है। हालांकि जांच अधिकारियों का कहना है कि चोरी का सिलसिला इससे काफी पहले से चल रहा था। आरोपियों ने पुराने सबूत मिटाने की भी कोशिश की, लेकिन बैंक खातों में जमा रकम का रिकॉर्ड उनके खिलाफ अहम सबूत बन गया।

बैंक में पहले से जमा हो रही थी रकम

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों के बैंक खातों में काफी समय से नियमित रूप से बड़ी रकम जमा हो रही थी। पूछताछ में आरोपी यह नहीं बता पा रहे हैं कि उनके खातों में जमा पैसा कहां से आया। इससे पुलिस को शक है कि चोरी की रकम लंबे समय से बैंक खातों के जरिए छिपाई जा रही थी।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft, Ram Temple Donation Scam
Image Source : PTIराम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले के एक आरोपी के घर पहुंची पुलिस।

नियमों की अनदेखी से बढ़ी गड़बड़ी

जांच में यह भी पता चला है कि चढ़ावे की गिनती के लिए बनाए गए सुरक्षा नियमों का धीरे-धीरे पालन बंद कर दिया गया था।

जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:

  1. कलेक्शन सेंटर में चढ़ावा गिनने के नियमों की लगातार अनदेखी की गई।
  2. कर्मचारियों की आवाजाही के दौरान होने वाली तलाशी में ढिलाई बरती जाने लगी।
  3. शुरुआत में गिनती करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाली टी-शर्ट और पैंट पहनने का नियम था, ताकि नकदी छिपाई न जा सके, लेकिन बाद में इस नियम का भी पालन नहीं हुआ।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद बनाई गई थी पूरी व्यवस्था

राम मंदिर में वर्ष 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा और चढ़ावे के सुरक्षित प्रबंधन के लिए विस्तृत व्यवस्था बनाई गई थी। मंदिर परिसर में अलग-अलग स्थानों पर 40 दान पात्र लगाए गए। यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में कलेक्शन सेंटर बनाया गया, जहां चढ़ावे की गिनती होती थी। ट्रस्ट ने वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कड़े सुरक्षा नियम भी तय किए थे, लेकिन जांच में सामने आया है कि समय के साथ इन नियमों का पालन कमजोर पड़ता गया।

आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुरू किया खेल?

जांच के मुताबिक, जब भगवान रामलला अस्थायी मंदिर में विराजमान थे, तब चढ़ावे की मात्रा सीमित थी। लेकिन भव्य मंदिर में गर्भगृह में विराजमान होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावा दोनों तेजी से बढ़े। बढ़ते काम को देखते हुए बैंक ने चढ़ावा गिनने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति शुरू की। महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अयोध्या पहुंचने से चढ़ावे की मात्रा और बढ़ गई। उस समय चढ़ावे की गिनती के लिए करीब 40 कर्मचारियों को लगाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से गड़बड़ियों की शुरुआत हुई।

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