उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में कानून-व्यवस्था और खाकी के इकबाल पर उस समय एक बड़ा सवालिया निशान लग गया, जब पुलिस अभिरक्षा में खड़े दो शातिर अपराधी सरेआम पुलिस अधिकारियों और मीडिया के कैमरों के सामने अपनी मूंछों पर ताव देता नजर आए। एसपी संदीप कुमार मीना के निर्देशन में एसओजी और मेंहदावल पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा किए गए एक बड़े खुलासे में जब पुलिस प्रेस कांफ्रेंस कर रही थी, उस समय पीछे खड़े अपराधी अपनी मूंछों पर ताव दे रहे थे।
पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी करके मुहिया पुल के पास से गोरखपुर निवासी दो बेहद शातिर लुटेरों, मोहम्मद कामिल और मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार किया। इनके पास से दो किलो सौ ग्राम अवैध गांजा, चार मोबाइल, छह सिम कार्ड, वारदात में इस्तेमाल बाइक और महिला से लूटी गई चेन को बेचकर कमाए गए दस हजार रुपये बरामद हुए।
पूछताछ में हत्या का खुलासा
कड़ी पूछताछ में पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा भी किया, जिसमें आरोपी मोहम्मद अहमद ने कुबूल किया कि उसने साल 2020 में चोरी के पैसों के बंटवारे के विवाद में अपने ही एक साथी की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि ये शातिर बदमाश सीसीटीवी से बचने के लिए गोरखपुर शहर के बजाय ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाते थे और कैप व मुंह ढककर महिलाओं से झांसा देकर चेन छीनते थे तथा विरोध करने पर मिर्च पाउडर का इस्तेमाल करते थे। बीते 23 मई को मेंहदावल में एक महिला से पानी मांगने के बहाने चेन छीनने की वारदात को भी इन्होंने ही अंजाम दिया था।
कैमरे के सामने दिया मूछों पर ताव
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और हत्याकांड के खुलासे की कामयाबी अपनी जगह काबिल तारीफ है, लेकिन इस पूरी कामयाबी के बीच आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पुलिस महकमे की कार्यशैली और अपराधियों में कानून के खौफ के दावों की हवा निकाल कर रख दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, जहां कायदे से शातिर लुटेरों और हत्यारे के मन में पुलिस का खौफ और अपने गुनाहों का पछतावा दिखना चाहिए था, वहां एक आरोपी सरेआम पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में कैमरे के सामने अपनी मूंछों पर ताव देता रहा।
बदमाशों में पुलिस का डर नहीं
पुलिस की गिरफ्त में होने के बावजूद अपराधी का यह बेखौफ अंदाज और हेकड़ी सीधे तौर पर कानून के इकबाल को खुली चुनौती देती महसूस हुई। इस नजारे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अपराधियों के मन से खाकी का डर पूरी तरह गायब हो चुका है? पुलिस भले ही अपनी सूझबूझ से बदमाशों को पकड़कर पीठ थपथपा रही हो, लेकिन भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपराधी का यह दुस्साहस साफ बयां करता है कि सलाखों के पीछे जाने के बाद भी इन बदमाशों में कानून का कोई डर नहीं है, जो पुलिसिया तंत्र की कमजोरी और ढीली साख पर एक बड़ा और तगड़ा प्रहार है।
(संतकबीरनगर से राज श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
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