कानपुर: उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग में सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का गंभीर मामला सामने आया है। विजिलेंस विभाग की जांच में उनके पास कुल 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपये मूल्य के गहने और आलीशान अचल संपत्तियां भी शामिल हैं। इस खुलासे के बाद विजिलेंस के कानपुर सेक्टर ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले की जांच अब एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से चंदौली जिले के बम्हनियांव गांव के निवासी केशव लाल वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-34 में रहते हैं। उनकी संपत्ति की जांच लंबे समय से चल रही थी। साल 2017 में जब उनकी तैनाती कानपुर में थी, तब 19 अप्रैल को आयकर विभाग ने उनके नोएडा स्थित आवास पर छापा मारा था। इस छापे में करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और 3 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की ज्वेलरी बरामद हुई थी। नोटों की गड्डियां घर के गद्दों, पूजा घर, अलमारी, बाथरूम के बंद फ्लश टैंक और बेडरूम के विभिन्न हिस्सों से निकाली गईं। जांच के दौरान केशव लाल इस नकदी और जेवर का कोई संतोषजनक ब्योरा नहीं दे सके, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।
जांच में क्या सामने आया?
छापे के कुछ दिनों बाद मई 2017 में शासन ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी और पूरी जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई थी। विजिलेंस की विस्तृत जांच में पुष्टि हुई कि केशव लाल की कुल संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से कई गुना अधिक है। शुरुआती छापे में बरामद 10 करोड़ नकदी और 3 करोड़ की ज्वेलरी के अलावा, आगे की जांच में उनकी कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से ऊपर निकली। इसमें अचल संपत्तियां, गहने, नकदी और अन्य निवेश शामिल हैं। विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी, जिसके बाद शासन की मंजूरी मिलने पर अब औपचारिक मुकदमा दर्ज किया गया है।
किन संपत्तियों के बारे में पता लगा?
जांच में सामने आया कि केशव लाल के पास पांच अलग-अलग शहरों में बहुमूल्य संपत्तियां हैं। इनमें लखनऊ में दो, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति शामिल है। सभी संपत्तियों की अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये में है। इन संपत्तियों का अधिग्रहण उन्होंने वाणिज्य कर विभाग में अपनी तैनाती के दौरान किया था। 2017 के आयकर छापे के समय भी उनके पास लग्जरी कारें, फार्म हाउस और अन्य संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे, जिनकी जांच जारी रही। बाद में उनकी पेंशन भी 100 प्रतिशत काटने का फैसला लिया गया था, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाता है।
जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई
यह मामला उत्तर प्रदेश प्रशासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि केशव लाल ने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी सभी संपत्तियों को जब्त करने और आगे की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। राजपत्रित अधिकारी द्वारा जांच में सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा, जिसमें संपत्तियों के स्रोत, बैंक ट्रांजेक्शन, परिवार के सदस्यों की भूमिका और अन्य संदिग्ध लेन-देन शामिल होंगे।
विजिलेंस की जांच रिपोर्ट और शासन की अनुमति के बाद शुरू हुई यह प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ेगी। केशव लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में सजा और संपत्ति जब्ती दोनों की संभावना है। उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव)
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