बिहार के गया जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के पास का एक दिल छू लेने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक दिव्यांग (बिन पैर वाले) व्यक्ति को देखा जा सकता है, जो खुद सड़क किनारे भीख मांग रहा था, लेकिन बौद्ध भिक्षुओं को देखकर अपनी जेब के चंद सिक्के और पास रखा थोड़ा सा खाना दान कर देता है। इस भावुक करने वाले दृश्य को अब तक 3.6 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
इंस्टाग्राम पर भी इस वीडियो को काफी शेयर किया जा रहा है। लोग कैप्शन में लिख रहे हैं कि, “मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। जब करुणा से भरा दिल किसी की मदद के लिए झुकता है, तब इंसानियत की सबसे सुंदर तस्वीर सामने आती है।” वीडियो में बौद्ध भिक्षु दान पात्र लेकर आ रहे हैं। सड़क किनारे बैठा दिव्यांग व्यक्ति अपनी जेब टटोलने लगता है। एक भिक्षु उसके पास रुकते हैं। वह व्यक्ति जेब से कुछ सिक्के निकालता है और पास रखा खाना भी भिक्षु के पात्र में डाल देता है।
दिव्यांग के जेस्चर ने जीते लाखों दिल
दान करने के बाद वह अपनी टोपी उतारता है, दोनों हाथों से भिक्षु के पैर छूता है और सिर झुकाकर नमन करता है। बदले में भिक्षु उसे पानी की छोटी बोतल और बिस्कुट का पैकेट देते हैं। फिर अपने पात्र से एक और बिस्कुट पैकेट और कुछ नकद राशि निकालकर देते हैं तथा सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हैं। आसपास के अन्य भिक्षु और लोग भी इस दृश्य को देखकर प्रसन्न नजर आते हैं।
इमोशनल होकर लोगों ने किए कमेंट
यह वीडियो 27 अक्टूबर 2026 के आसपास शेयर किया गया था और तेजी से फैला। यूजर्स ने इसे इंसानियत का उदाहरण बताया। कई लोगों ने कहा कि अमीरी पैसे से नहीं, दिल की विशालता से तय होती है। कुछ ने दिव्यांग व्यक्ति को “पृथ्वी का सबसे अमीर व्यक्ति” करार दिया क्योंकि उसकी मानवता अमूल्य है। वीडियो देखने वाले कई लोग आंसू रोक नहीं पाए।
एक यूजर ने लिखा, “यही मानवता की परिभाषा है।”
दूसरे ने कहा, “हर कोई बौद्धों की तारीफ कर रहा है, लेकिन मैं उस शारीरिक रूप से अक्षम गरीब व्यक्ति की तारीफ करता हूं, जिसने बिना सोचे-समझे अपना सब कुछ दे दिया। इसी तरह उसने अपनी अमीरी दिखाई।”
तीसरे ने लिखा, “जिंदगी में हर हाल में खुश रहना, इस इंसान ने सिखा दिया।” एक और कमेंट था, “बात पैसे की नहीं, देने वाला दिल कितना बड़ा है।”
महाबोधि मंदिर के बारे में
महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। यहां रोजाना भिक्षु भिक्षाटन करते हैं। इस वीडियो में दिखाया गया कि असली दान वही है जो अपनी जरूरत के बावजूद दिया जाए। दिव्यांग व्यक्ति के पास खुद सीमित संसाधन थे, फिर भी उसने पीछे नहीं हटा। भिक्षु का जवाबी स्नेह और आशीर्वाद इस दृश्य को और भावुक बना देता है।
(गया से अजीत कुमार की रिपोर्ट)
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