दिल्ली का रामलीला मैदान देश की राजनीति, संस्कृति और जन आंदोलनों का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। लगभग 10 से 12 एकड़ में फैला यह खुला मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और दिल्ली गेट के पास स्थित है। अक्सर राजनीतिक रैलियों, प्रदर्शनों और धार्मिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल होने वाले इस मैदान को लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है कि इसका असली मालिक कौन है और बुकिंग कैसे होती है।
रामलीला मैदान का मालिकाना हक
अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामलीला मैदान किसी निजी व्यक्ति, ट्रस्ट या संगठन की संपत्ति नहीं है। यह पूरी तरह सरकारी सार्वजनिक भूमि है। कानूनी स्वामित्व केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (Land & Development Office - L&DO) के पास है, जो आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है। 1959 में L&DO ने इस भूमि को नाममात्र शुल्क (एक रुपये) पर दिल्ली नगर निगम (MCD) को लाइसेंस पर दिया था। दैनिक रखरखाव, संचालन और बुकिंग का काम MCD के बागवानी (Horticulture) विभाग द्वारा किया जाता है। बुकिंग से होने वाली आय भी MCD के खजाने में जाती है।
रामलीला मैदान का इतिहास
मूल रूप से यह जगह एक बड़ा तालाब थी। 1930 के दशक की शुरुआत में इसे भरकर खुला मैदान बनाया गया, ताकि यमुना किनारे (लाल किले के पीछे) बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से रामलीला का आयोजन यहां शिफ्ट किया जा सके। नाम भी वार्षिक रामलीला से पड़ा। मुगल काल में भी आसपास रामलीला होती थी। आजादी के बाद यह राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख स्थल बन गया।
रामलीला मैदान में हुए प्रमुख आंदोलन
रामलीला मैदान में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभई पटेल जैसी हस्तियों की सभाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री का “जय जवान जय किसान” नारा (1965) और रामधारी सिंह दिनकर का “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” नारा भी यहीं गूंजा था। इसके अलावा कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार हैं:
- 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सत्याग्रह : जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यहां सत्याग्रह किया था।
- 1975 का जयप्रकाश नारायण आंदोलन : 25 जून 1975 को जेपी ने यहां विशाल रैली को संबोधित किया और इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया। उसी रात आपातकाल लागू कर दिया गया।
- 1977 में जनता पार्टी की रैली : आपातकाल समाप्त होने के बाद फरवरी 1977 में मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और चरण सिंह जैसे नेताओं के नेतृत्व में यहां संयुक्त विपक्ष की ऐतिहासिक रैली हुई थी।
- 1991 में विश्व हिंदू परिषद का आंदोलन : VHP और सहयोगी संगठनों द्वारा रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में देश भर से लाखों लोग अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर जुटे थे।
- 2011 का अन्ना हजारे आंदोलन : इंडिया अगेंस्ट करप्शन अभियान यहीं केंद्रित रहा। जन लोकपाल बिल की मांग ने पूरे देश को प्रभावित किया और बाद में आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ।
- 2011 में स्वामी रामदेव का आंदोलन : काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्वामी रामदेव ने भी रामलीला मैदान में बड़ा आंदोलन और अनशन किया था।
रामलीला मैदान की बुकिंग प्रक्रिया
मैदान की बुकिंग MCD के बागवानी विभाग के माध्यम से होती है। आवेदक को पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 एकड़ का यह ग्राउंड जिसमें 50,000 लोग बैठ सकते हैं, अब साल के आखिर में सिर्फ तीन तारीखों के लिए ही बुक किया जा सकता है। एक दिन की बुकिंग का शुल्क लगभग 50,000 रुपये है, साथ में 55,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट और टैक्स मिलाकर कुल खर्च करीब 1.21 लाख रुपये बैठता है। पूरा उपलब्ध हिस्सा ही बुक किया जाता है, आंशिक बुकिंग नहीं होती। धार्मिक आयोजनों (रामलीला आदि) के लिए अलग नियम लागू होते हैं।
गौरतलब है कि, इससे पहले हमने आपको मयूर विहार से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में बताया था।
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