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केंद्र से टकराव के बीच आलापन बन्दोपाध्याय का रिटायरमेंट, बने ममता के सलाहकार

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव आलापन बन्दोपाध्याय ने समय से पहले ही अपना रिटायरमेंट ले लिया है। केन्द्र सरकार ने उनको मंगलवार को दिल्ली आकर नॉर्थ ब्लाक स्थित दफ्तर में रिपोर्ट करने को कहा था। उनके रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बन्दोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार बना लिया है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: May 31, 2021 22:10 IST
Bengal Chief Secretary Alapan Bandyopadhyay Retires, Appointed Adviser To CM Mamata- India TV Hindi
Image Source : PTI पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय ने समय से पहले ही अपना रिटायरमेंट ले लिया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव आलापन बन्दोपाध्याय ने समय से पहले ही अपना रिटायरमेंट ले लिया है। केन्द्र सरकार ने उनको मंगलवार को दिल्ली आकर नॉर्थ ब्लाक स्थित दफ्तर में रिपोर्ट करने को कहा था। उनके रिटायरमेंट के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बन्दोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार बना लिया है। मंगलवार से आलापन बन्दोपाध्याय मुख्य सलाहकार के तौर पर काम शुरू करेंगे। वह अगले तीन साल तक मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बने रहेंगे। वहीं, मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी हरिकृष्ण द्विवेदी को सौंपी गई है। वहीं केंद्र ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को रिपोर्ट करने में विफल रहने पर केंद्र सरकार ने आलापन बन्दोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

इससे पहले आलापन बन्दोपाध्याय को दिल्ली बुलाने के केंद्र के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह आदेश वापस लेने का अनुरोध किया था। बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार बन्दोपाध्याय को कार्यमुक्त नहीं कर रही है। बनर्जी ने प्रधानमंत्री को भेजे पांच पन्नों के पत्र में, मुख्य सचिव को तीन माह का सेवा विस्तार दिए जाने के बाद, उन्हें वापस बुलाने के केंद्र सरकार के फैसले पर पुन:विचार करने का अनुरोध किया। 

बनर्जी ने कहा कि वह केंद्र के फैसले से स्तब्ध हैं। उन्होंने आदेश को एकपक्षीय करार दिया जो राज्य सरकार से बिना कोई परामर्श किये जारी किया गया है। बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा, “यह तथाकथित एकपक्षीय आदेश बेवजह और आपकी खुद की स्वीकारोक्ति के उलट तथा राज्य व उसके लोगों के हितों के खिलाफ है। मैं विनम्रतापूर्वक आपसे अनुरोध करती हूं कि व्यापक जनहित में अपने तथाकथित नवीनतम आदेश को वापस लें, पुनर्विचार करें और उसे रद्द करें। मैं पश्चिम बंगाल के लोगों की तरफ से आपसे अंतरात्मा और अच्छी भावना से ऐसा करने की अपील करती हूं।” 

बता दें कि केंद्र ने एक आकस्मिक फैसले में 28 मई की रात को बन्दोपाध्याय की सेवाएं मांगी थीं और राज्य सरकार को प्रदेश के शीर्ष नौकरशाह को तत्काल कार्यमुक्त करने को कहा था। केन्द्र ने आलापन बन्दोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का आदेश चक्रवाती तूफान यास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक को मुख्यमंत्री द्वारा महज 15 मिनट में निपटाने से उत्पन्न विवाद के कुछ घंटों के बाद दिया। 

1987 बैच के, पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी आलापन बन्दोपाध्याय साठ साल की उम्र पूरी होने के बाद सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले थे। बहरहाल, उन्हें केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद तीन माह का सेवा विस्तार दिया गया। तीन महीने का सेवा विस्तार देने के बाद बन्दोपाध्याय को वापस बुलाए जाने के पूरे प्रकरण को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या इस फैसले का 28 मई को पश्चिम मिदनापुर जिले के कलईकुंडा में प्रधानमंत्री के साथ उनकी और मुख्य सचिव की बैठक से कोई संबंध है।

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