कोलकाता: CM सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान, पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "जब भी वे मुश्किल में होती हैं, तो कोर्ट जाती हैं। वे कोर्ट का फैसला नहीं मांगतीं... आज उनके पास जो कुछ भी था, वह सब चला गया है... उन्हें लगता है कि वे अभी भी चुनाव लड़ रही हैं और हारी नहीं हैं..." TMC सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ काकोली घोष दस्तीदार की शिकायत पर उन्होंने कहा, "अपनी ही पार्टी के विधायकों, जैसे महुआ मोइत्रा और काकोली घोष, की ओर से कल्याण बनर्जी के खिलाफ कई शिकायतें हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब कार्रवाई का समय आ गया है..."
हाई कोर्ट क्यों पहुंचीं ममता बनर्जी?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार और पार्टी में पड़ी फूट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गईं। ममता ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजे को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है और चुनाव परिणाम की वैधता की जांच करने की मांग की है। ममता ने खुद से याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव गलत तरीके से हुआ है। याचिका में ये भी कहा गया है कि 12 राउंड की काउंटिंग के बाद इलेक्शन एजेंट और मुझे पीटा गया और बूथ से बाहर कर दिया गया।
बता दें कि भवानीपुर सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया था। ममता इस सीट से पहले तीन बार विधायक रह चुकी हैं। चुनाव के दौरान उन्होंने मतगणना में गड़बड़ी और अपने साथ मारपीट के आरोप भी लगाए थे।
सुप्रीम क्यों पहुंच गई थीं ममता बनर्जी?
विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थीं। ममता बनर्जी एसआईआर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं थीं और पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान वह अदालत में घंटों मौजूद रहीं थीं।अपनी दलीलों में ममता बनर्जी ने कहा कि 2025 की मतदाता सूची को ही आधार बनाया जाना चाहिए और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी नए प्रयोग से बचना चाहिए। ममता ने कोर्ट में बहस में भी हिस्सा लिया था।
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