Bhabanipur Result: भवानीपुर पश्चिम बंगाल की सबसे अहम 'हॉट सीट' थी। इस मुश्किल सीट की पूरी जिम्मेदारी और चुनाव पर्यवेक्षण का काम राजेंद्र राठौड़ को सौंपा गया था। राजेंद्र राठौड़ बताते हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया, तो भवानीपुर में टीएमसी के गुंडों और सरकार के दबाव के कारण दहशत का माहौल था। लोग अपनी बात नहीं रख पाते थे। बीजेपी ने सबसे पहले लोगों के मन से उस डर को निकालने का काम किया।
बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित है भवानीपुर
राजेंद्र राठौड़ ने आगे बताया कि इस चुनाव में गुजराती और राजस्थानी (हिंदी भाषी) लोग एकजुट हुए। यहां एक तरह का ध्रुवीकरण हुआ। उन्होंने घर-घर और गली-गली जाकर लोगों से पूछा कि जिस सीट ने राज्य को मुख्यमंत्री दिया है, उस मुख्यमंत्री ने उनके वार्ड में बुनियादी ढांचे सड़कों और नालियों के लिए क्या किया है।
अपने ही गढ़ में क्यों हारीं ममता बनर्जी?
उन्होंने कहा कि फिर लोगों को जब अपने इलाके में विकास नजर नहीं आया तो उनका मन बदलने लगा। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विश्वास और चुनाव आयोग की अहम भूमिका के कारण लोगों ने निडर होकर वोट किया। राठौड़ के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी की ईमानदारी, बेबाकी और गरीबों के साथ खड़े होने की इमेज ने मुख्यमंत्री को उनके ही गढ़ में हरा दिया।
ममता बनर्जी के आरोपों पर पलटवार
जब ममता बनर्जी की तरफ से लगाए गए 'बूथ लूटने और मारपीट' के आरोपों के बारे में पूछा गया, तो राजेंद्र राठौड़ ने इसे 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' की कहावत से जोड़ा।
माइक्रो-मैनेजमेंट से तोड़ी गुंडागर्दी
राजेंद्र राठौड़ बोले कि टीएमसी को अपने क्लबों में बैठे लोगों की तरफ से मतदाताओं को डराने पर भरोसा था। लेकिन बीजेपी ने माइक्रो लेवल पर हर बूथ और 'शक्ति केंद्र' की मजबूत रचना की, जिससे विपक्ष की मोनोपोली और गुंडागर्दी टूट गई और यह प्रचंड जीत हासिल हुई।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भवानीपुर से पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है तो राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है। ये नेतृत्व तय करेगा। लेकिन ये एक बड़े नेता का करिश्मा है।