कोलकाताः हकीमपुर चेकपोस्ट पर 200 से ज़्यादा बांग्लादेशी अभी भी बांग्लादेश लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं। हालांकि, आज इन्हीं लोगों के बीच इंडिया टीवी से मुलाक़ात बुज़ुर्ग महिला अनवारा बीबी से हुई। उनके पास भारतीय पहचान पत्र यानी आधार कार्ड है। उनके पास बांग्लादेशी नागरिकता का प्रमाण भी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि उन्होंने इसी साल अक्टूबर में बांग्लादेशी नागरिकता का प्रमाण बनवाया था।
यानी बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद बुज़ुर्ग अनवारा बीबी ने बांग्लादेशी नागरिकता सर्टिफिकेट बनवाई लेकिन उन्होंने यह सब कैसे बनवाया। इसके बारे में वह कैमरे के सामने विस्तार से नहीं बताना चाहती थीं।
बांग्लादेशियों ने बताया कैसे भारत में घुसे
मेहदी हसन भी इसी इलाक़े में बांग्लादेश लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं। मेहदी हसन गा सकते हैं। उनका घर बांग्लादेश के जेसोर ज़िले में है। जन्म से अंधे मेहदी हसन 20 साल पहले अपने मां बाप के साथ आंखों का इलाज कराने के लिए चुपके से सीमा पार कर गए थे। आंखों का इलाज कराने के बाद भी, वह बांग्लादेश नहीं लौटे।
इसी तरह मोहम्मद सोहाग बांग्लादेश के बारीसाल ज़िले से गुपचुप तरीके से रोज़ी-रोटी कमाने के लिए भारत आ गए थे। वे उत्तर 24 परगना ज़िले में पेट्रापोल सीमा के रास्ते भारत आए और तमिलनाडु चले गए। वहां वे दर्जी का काम करते थे। अब वे SIR शुरू होते ही घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं। अब सवाल है कि अनवरा बीबी के जैसे कितने लोग भारत में आकर अपने परिचय पत्र बनाए थे?