पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी खुशखबरी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को सरकारी कर्मचारियों को 25 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का निर्देश दिया है। इस आदेश के आने से पहले इस मामले को 18 बार स्थगित किया जा चुका है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने किया।
बेंच ने सुनाई करते हुए अपने अंतरिम आदेश में ममता सरकार को तीन माह के भीतर कर्मचारियों को 25% महंगाई भत्ता (डीए) देने को कहा। वहीं, अगली सुनवाई कोर्ट ने अगस्त में तय की है। बीते दिन सरकारी वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दूसरे मामले में अपनी सुनवाई के कारण स्थगन की मांग की थी,जिस स्वीकार करते हुए कोर्ट ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया और फिर आज इस पर राज्य सरकार को निर्देश दिया है।
क्या है मामला?
कथित तौर पर यह विवाद सरकारी कर्मचारियों व राज्य सरकार की काफी समय से चल रहा है। कर्मचारियों के एक गुट ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में डीए को लेकर एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने राज्य सरकारी से केंद्र सरकार के कर्मियों के समान ही डीए देने की मांग की थी। जैसे-जैसे यह मामला बढ़ा इसे कई साल हो गए, हालांकि इस बीच सरकार ने कुछ मौकों पर डीए बढ़ाया, लेकिन यह फिर भी केंद्र सरकार के मुकाबले 37% पीछे रहा।
इसके बाद मई 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को केंद्रीय दर पर डीए देने का निर्देश दिया, लेकिन फिर पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। सरकार ने यह अपील नवंबर 2022 में दायर की थी, तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में 2 साल 4 महीने के टाइम पीरिएड में 17 बार इस मामले की सुनवाई स्थगित हुई और अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों को 25% डीए देने का निर्देश दिया है।
विपक्ष नेता सुवेंदु अधिकारी ने फैसले का किया स्वागत
इस फैसले का विपक्ष नेता सुवेंदु अधिकारी ने स्वागत किया है और कहा कि मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और संदीप मेहता द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को दिए गए निर्देश का स्वागत करता हूँ, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों के अब तक लंबित डीए एरियर का 25% तत्काल जारी करने का निर्देश दिया गया है।
सदस्यों और अधिकारियों को दी बधाई
आगे कहा कि यह पश्चिम बंगाल सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत है, जो लंबे समय से पश्चिम बंगाल की अविवेकी और कठोर दिल वाली राज्य सरकार के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं, न्यायाधिकरणों से लेकर माननीय कोर्ट के दरवाजे खटखटा रहे हैं। भाजपा से संबद्ध 'कर्मचारी परिषद' (राष्ट्रवादी पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों का संघ) ने इस कानूनी लड़ाई में आगे बढ़कर नेतृत्व किया। दमनकारी ममता सरकार पर इस जीत के लिए सदस्यों और अधिकारियों को बधाई।
डीए वास्तव में एक अधिकार- अधिकारी
आगे उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने कहा था कि "डीए कोई अधिकार नहीं है"। आज का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश यह स्थापित करता है कि डीए वास्तव में एक अधिकार है। मुझे उम्मीद है कि ममता बनर्जी लाखों राज्य सरकार के कर्मचारियों के अधिकारों को सालों तक नकारने की जिम्मेदारी लेंगी और अपना इस्तीफा देंगी।
ये भी पढ़ें:
तृणमूल कांग्रेस के विधायक तापस साहा की हुई मौत, मस्तिष्काघात की वजह से गई जान