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लद्दाख में चीन ने लगाए मोबाइल टॉवर, क्या अरुणाचल की तरह यहां भी बस्ती बसाएगा 'ड्रैगन'?

सीमा के नज़दीक ड्रैगन की हलचल तेज हुई थी। इसलिए इससे इनकार तो नहीं किया जा सकता कि चीन अब अरुणाचल की तरह ही लद्दाख में भी अपना जाल बिछा रहा है।

Puneet Saini Edited by: Puneet Saini
Updated on: April 19, 2022 15:02 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनिया अभी रूस और यूक्रेन के युद्ध से उत्पन्न संकट से बाहर नहीं निकल पाई है कि चीन ने अपनी नापाक साजिशों के अंजाम देना शुरू कर दिया है। चीन इस पूरे युद्ध के दौरान रूस के साथ खड़ा नज़र आया। दूसरी तरफ, भारत और चीन भी सीमा पर आमने-सामने है। एक अखबार ने दावा किया कि चीन लद्दाख पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।

इस कड़ी में चीन ने लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल टॉवर भी लगाना शुरू कर दिया है। चीन की इस हरकत की जानकारी चारागाह से अपने जानवरों को वापस लेकर आ रहे चरवाहों ने दी है। अब सवाल उठता है कि क्या चीन मोबाइल टॉवर को सहारा बनाकर सीमावर्ती इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है?

एक्सपर्ट्स से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि पहली बात तो सीमावर्ती इलाकों में चीन के मोबाइल टॉवर लगाने से एक बात तो साबित हो गई है कि भारत की सीमावर्ती इलाकों में पकड़ कमजोर हो रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत इस पर कोई फैसला लेना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो इसमें कहीं न कहीं हमारी ही कमजोरी है। 

अरुणाचल प्रदेश में क्या हुआ था?

चीन ने अपने नए सीमा क़ानून के तहत पूर्वी इलाक़े में सीमावर्ती क्षेत्रों में 'दोहरे इस्तेमाल के लिए' गांवों का निर्माण किया था। इन गांवों को खतरे के तौर पर देखा जा रहा था क्योंकि इन्हें लेकर दावा था कि ये गांव स्थायी सैन्य शिविर में तब्दील हो चुके हैं।

एक्सपर्ट्स की मानें तो पहले चीन ने यहां भी सीधे दखल नहीं दिया था। सीमा के नज़दीक ड्रैगन की हलचल तेज हुई थी। इसलिए इससे इनकार तो नहीं किया जा सकता कि चीन अब अरुणाचल की तरह ही लद्दाख में भी अपना जाल बिछा रहा है। ऐसा बिल्कुल संभव है कि इन मोबाइल टॉवर्स का इस्तेमाल वह लद्दाख के बारे में खबर लेने के लिए भी करे। क्योंकि इनका यहां लगने का मतलब है कि इसकी कवरेज पूरे लद्दाख में होगी।

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