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अमेरिका ने ईरान के "Frigate Dena" युद्धपोत को समुद्र में डुबो कर किया महा-क्रूर अपराध, अब्बास अराघची ने दी कड़ी चेतावनी

 Published : Mar 05, 2026 12:49 pm IST,  Updated : Mar 05, 2026 12:50 pm IST

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डेना फ्रिगेट युद्धपोत को अमेरिका द्वारा समुद्र में डुबोये जाने पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मेरे शब्दों को याद रखें, बड़ा अफसोस होगा।

ईरान का IRIS Dena Warship, जिसे अमेरिका ने समुद्र में डुबोया(फाइल फोटो)- India TV Hindi
ईरान का IRIS Dena Warship, जिसे अमेरिका ने समुद्र में डुबोया(फाइल फोटो) Image Source : AP

तेहरानः अमेरिका ने ईरान के तट से 2000 मील दूर समुद्र में ईरान के IRIS फ्रिगेट डेना युद्धपोत को समुद्र में डुबो कर महा-क्रूर अपराध किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से यह बात कही है। उन्होंने एक्स पर  लिखा: "अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक क्रूरता की है। फ्रिगेट डेना भारतीय नौसेना की अतिथि थी और लगभग 130 नाविकों को लेकर जा रही थी। अमेरिका द्वारा उस पर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में बिना चेतावनी के हमला किया गया। मेरे शब्दों को याद रखें: अमेरिका को जिस मिसाल का उसने निर्माण किया है, उसका उसे कड़वा पछतावा होगा।"

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा-अमेरिका को फैसले पर होगा पछतावा

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका के इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही है। उन्होंने चेताया है कि ऐसा करके अमेरिका ने महाअपराध के साथ बड़ी क्रूर गलती की है, जिसका उसे आने वाले समय में बहुत बड़ा अफसोस होगा। अराघची ने बृहस्पतिवार को एक्स के माध्यम से ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena के डूबने की घटना पर प्रतिक्रिया है, जिसे अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने भारतीय महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर एक मार्क 48 टॉरपीडो से डुबो दिया। 

ईरानी युद्धपोत को डुबोने के बाद अमेरिकी रक्षामंत्री ने कहा-शांत मौत

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन की ब्रिफिंग में ईरानी युद्धपोत डेना को डुबोने की पुष्टि की और इसे "शांत मौत" (quiet death) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दुश्मन जहाज पर पहला टॉरपीडो हमला है। IRIS Dena (मौज क्लास फ्रिगेट) ईरान की नौसेना का नया और महत्वपूर्ण जहाज था, जो सतह-से-हवा मिसाइल, एंटी-शिप मिसाइल और टॉरपीडो से लैस था। यह भारतीय नौसेना के MILAN 2026 बहुपक्षीय अभ्यास और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के बाद विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था। जहाज पर लगभग 180 नाविक सवार थे।

श्रीलंका ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

श्रीलंका की नौसेना ने डिस्ट्रेस कॉल मिलने पर बचाव अभियान चलाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 87 शव बरामद हुए, 32 नाविकों को बचाया गया, जबकि 60 से अधिक लापता हैं। हालांकि कुल मौतें कई स्रोतों में 80-100 के पार तक बताई जा रही हैं। अमेरिका ने इसे Operation Epic Fury का हिस्सा बताया, जो 28 फरवरी 2026 से इज़रायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा है। यह हमला ईरान-इज़राइल संघर्ष को मध्य पूर्व से बाहर फैलाता है।ईरान ने इसे "अत्याचार" और "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार दिया है। अरागची का ट्वीट अमेरिका को चेतावनी देता है कि यह घटना दीर्घकालिक परिणाम भुगतेगी। भारत ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन घटना भारतीय नौसेना के अभ्यास से जुड़ी होने के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है। यह 2026 ईरान युद्ध की सबसे बड़ी नौसैनिक घटनाओं में से एक है।

कैसे हुई थी घटना

ईरानी फ्रिगेट IRIS डेना को अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने मार्क 48 टॉरपीडो से भारतीय महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल में डुबो दिया था। जहाज भारतीय नौसेना के MILAN-2026 व्यायाम और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू से लौट रहा था। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे WWII के बाद पहला टॉरपीडो हमला बताया, जिसमें कम से कम 87 नाविक मारे गए, 32 बचाए गए, और बाकी लापता हैं। ईरान ने इसे "अत्याचार" करार दिया और अमेरिका को चेतावनी दी है।

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