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यूनुस सरकार ने शेख हसीना पर लिया ऐसा फैसला कि भड़क गईं पूर्व पीएम खालिदा जिया, BNP ने की कड़ी आलोचना

 Published : Oct 29, 2025 08:00 pm IST,  Updated : Oct 30, 2025 03:35 pm IST

यूनुस सरकार ने अभी तक बीएनपी के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आयोग के एक सदस्य ने कहा कि असहमतियां ‘बहुमत की सहमति’ में विलय हो गई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे ‘संक्रमणकालीन लोकतंत्र की परीक्षा’ बता रहे हैं, जहां सभी पक्षों की भागीदारी जरूरी है।

मोहम्मद यूनुस, बांग्लादेश के कार्यवाहक। - India TV Hindi
मोहम्मद यूनुस, बांग्लादेश के कार्यवाहक। Image Source : AP

ढाका: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के पूर्व पीएम शेख हसीना के मामले में जुड़े एक फैसले को लेकर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। बुधवार को अंतरिम सरकार की ‘जुलाई चार्टर’ लागू करने की योजना पर बीएनपी ने कड़ा प्रहार किया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली यह प्रमुख विपक्षी पार्टी का कहना है कि चार्टर में उसके असहमति वाले बिंदु जानबूझकर हटा दिए गए हैं, जो राजनीतिक दलों और जनता के साथ ‘खुला धोखा’ है। 

बीएनपी ने कहा-हैरानी भरा फैसला

बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने अंतरिम सरकार के उक्त निर्णय को ‘आश्चर्यजनक’ बताते हुए मांग की है कि पार्टी के विचारों को तुरंत बहाल किया जाए, वरना राष्ट्रीय एकता की नींव कमजोर हो जाएगी। यह विवाद ‘जुलाई अपराइजिंग’ के परिणामस्वरूप तैयार किए गए इस चार्टर को लेकर भड़का है, जिसमें पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों की आकांक्षाओं को संस्थागत रूप देने का लक्ष्य है। इन प्रदर्शनों ने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को अगस्त 2024 में सत्ता से उखाड़ फेंका था, जिसके बाद नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनी। 

 

चार्टर में क्या है, जिस पर मचा बवाल

इस चार्टर में राजनीति, अर्थव्यवस्था, न्यायपालिका और शिक्षा जैसे 80 से अधिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार प्रस्ताव शामिल हैं, जो देश को लोकतांत्रिक पटरी पर लाने का दावा करते हैं। राष्ट्रीय सहमति आयोग की अध्यक्षता करने वाले यूनुस ने विभिन्न राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और विशेषज्ञों से परामर्श के बाद 17 अक्टूबर को मसौदा जारी किया था। बीएनपी समेत कई दलों ने एक समारोह में इस पर हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन मंगलवार को प्रकाशित अंतिम रिपोर्ट में बीएनपी के असहमति नोट-जैसे चुनाव सुधारों में पारदर्शिता और विपक्ष की भूमिका पर जोर को पूरी तरह गायब कर दिया गया। आयोग ने इसके बजाय जनमत संग्रह के जरिए चार्टर को लागू करने की सिफारिश की है, जिसे बीएनपी ‘एकतरफा थोपना’ बता रही है।

 

बीएनपी ने कहा-देश के साथ हुआ धोखा

आलमगीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह न केवल हमारी पार्टी के साथ, बल्कि पूरे राष्ट्र के साथ विश्वासघात है। जुलाई के शहीदों की कुर्बानी को कमजोर करने का यह प्रयास अस्वीकार्य है। बीएनपी ने कहा- हमारी असहमतियां चार्टर की आत्मा का हिस्सा हैं और इन्हें नजरअंदाज करना लोकतंत्र की हत्या होगी।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुधार न किए गए तो बीएनपी सड़कों पर उतर आएगी, जो अंतरिम सरकार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद बांग्लादेश की अस्थिर राजनीति को और जटिल बना रहा है। अवामी लीग के अवशेषों के साथ-साथ बीएनपी का विरोध अंतरिम सरकार को कमजोर कर सकता है, खासकर जब देश आर्थिक संकट और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। (भाषा)

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