NATO on Taiwan: अमेरिका एक तरफ ग्रीनलैंड पर नजर गड़ाए है तो दूसरी तरफ चीन की निगाह ताइवान पर है। दुनिया में तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर और चीन द्वारा ताइवान पर हमले की आशंका बढ़ गई है। इस बीच नाटो के महासचिव मार्क रूट ने बेहद सनसनीखेज दावा किया है। रूट ने कहा कि "अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो वह कभी भी अकेले ऐसा नहीं करेगा। वह पुतिन को नाटो पर हमला करने के लिए मजबूर करेगा।"
रूट ने कहा चीन रूस को नाटो पर हमले के लिए करेगा मजबूर
अमेरिका की नेक्सटा टीवी पर दिए एक साक्षात्कर में नाटो महासचिव ने चेतावनी दी है कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो वह अकेला नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि चीन ऐसा करने से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मजबूर करेगा कि वे NATO पर हमला करें। रूट ने यह बयान मंगलवार को ब्रसेल्स में रिनिव यूरोप ग्लोबल यूरोप फोर-2026 में दिए गए मुख्य भाषण के दौरान दिया। रूट ने कहा, "यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो वे कभी अकेले नहीं करेंगे। वे अपने पार्टनर व्लादिमीर पुतिन को मजबूर करेंगे कि वे हमारे खिलाफ कार्रवाई करें। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।"
रूस-चीन के गठजोड़ पर जाहिर की चिंता
रूट ने रूस-चीन के बढ़ते गठजोड़ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन रूस को यूक्रेन युद्ध में हथियार, ड्रोन और अन्य सहायता दे रहा है, जबकि रूस उत्तर कोरिया और ईरान के साथ मिलकर काम कर रहा है। NATO के अनुसार, चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है और ऐसी स्थिति में बीजिंग मॉस्को को यूरोप में NATO को व्यस्त रखने के लिए उकसाएगा। इससे NATO को इंडो-पैसिफिक में ताइवान और यूरोप में रूस समेत दो मोर्चों पर युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।
नाटो को रक्षा बजट बढ़ाने का सुझाव
मार्क रूट ने NATO से रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन को मजबूत समर्थन देने और इंडो-पैसिफिक देशों (जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया) के साथ सहयोग बढ़ाने की अपील की। साथ ही NATO को मजबूत बनाने पर जोर दिया। ताकि रूस या चीन कोई आक्रामक कदम न उठा सकें। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन में भारी नुकसान झेल रहा है, लेकिन फिर भी खतरा बना हुआ है। NATO को आर्कटिक क्षेत्र में भी सतर्क रहना होगा, जहां रूस और चीन सक्रिय हैं। उनका यह बयान वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-रूस का गठजोड़ विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। NATO अब रक्षा क्षमता बढ़ाने और सहयोगियों के साथ एकजुटता पर फोकस कर रहा है।
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