तेहरानः ईरान में जारी हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान पर हमले की धमकी दिए जाने के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी धमकी के बाद अब ईरान ने भी क्षेत्रीय देशों को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करते हैं, तो वह उनके क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।
ईरान ने कई क्षेत्रीय देशों को भेजी चेतावनी
ईरान द्वारा उन सभी क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी एयरबेस पर हमले की चेतावनी भेजी गई है, जो उसके जद में हैं। ईरान की इस चेतावनी को गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई और मौतों के बाद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की धमकी दी है। ईरान ऑव्जर्बर के अनुसार एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), तुर्की और अन्य पड़ोसी देशों को संदेश भेजा है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने की स्थिति में उनके देशों में मौजूद यूएस बेस को निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने इन देशों से अपील की है कि वे वाशिंगटन को ऐसा कोई कदम उठाने से रोकें।
ईरान हिंसा में अब तक 2600 मौतें
यह खतरा ईरान में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां सरकारी दमन में अब तक 2,600 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा है कि "मदद रास्ते में है" और यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है, तो "बहुत ठोस कार्रवाई" होगी। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल को "वैध निशाना" करार दिया है।
तुर्की तनाव दूर करने को लेकर सक्रिय
अमेरिका और ईरान में युद्ध जैसे हालातों के मद्देनजर तुर्की ने इस तनाव को कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने पिछले 24 घंटों में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से दो बार फोन पर बात की है। इन बातचीत में क्षेत्रीय तनाव को कम करने और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया। तुर्की ने अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों से भी संपर्क किया है। कतर में अल उदैद एयर बेस से कुछ अमेरिकी कर्मियों को निकलने की सलाह दी गई है, जिसे "सुरक्षा मुद्रा में बदलाव" बताया जा रहा है।
ईरान-अमेरिका की सीधी वार्ता रद
ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत भी निलंबित कर दी है। क्षेत्रीय देशों में डर है कि यह स्थिति बड़े युद्ध में बदल सकती है। फिलहाल, तुर्की सहित कई देश डी-एस्केलेशन के प्रयास कर रहे हैं, ताकि स्थिति और नहीं बिगड़े । यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में पहले से ही अस्थिर स्थिति को और जटिल बना रहा है।
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