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Badrinath Temple Facts: बद्रीनाथ मंदिर के बारे में 10 ऐसी बातें जो आपने नहीं सुनी होंगी, यहां पढ़ें बद्री विशाल के पौराणिक रहस्य

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Apr 23, 2026 06:02 pm IST,  Updated : Apr 23, 2026 06:05 pm IST

Badrinath Temple Facts: बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुल चुके हैं और इसी के साथ चारधाम की यात्रा भी शुरू हो गई है। तो आइए जानते हैं बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े 10 अनसुने रहस्यों के बारे में।

बद्रीनाथ मंदिर- India TV Hindi
बद्रीनाथ मंदिर Image Source : PEXELS

Badrinath Temple: बद्रीनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए खुल चुके हैं। मंदिर के कपाट आज यानी 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। आपको बता दें कि बद्रीनाथ मंदिर को 'धरती का वैकुंठ' भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप 'बद्री विशाल' को समर्पित है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां कठोर तपस्या की थी। हिंदू धर्म में बद्रीनाथ को मुक्ति का द्वार माना जाता है। तो चलिए अब जानते हैं बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े पौराणिक रहस्यों के बारे में।

बद्रीनाथ धाम की 10 अद्भुत जानकारियां

  1. शंख बजाना है वर्जित-  बद्रीनाथ मंदिर में शंख बजाना पूर्ण रूप से वर्जित माना गया है। मंदिर में पूजा के दौरान शंख नहीं बजाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी यहां तपस्या कर रही थीं। उसी समय, भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस को मारा था, हिन्दू धर्म में जीत होने पर शंख बजाते हैं, पर विष्णु जी लक्ष्मी जी के ध्यान को भंग नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया। यही कारण है कि बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता है।

  2. वनतुलसी की माला- विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है लेकिन बद्रीनाथ मंदिर में नारायण को तुलसी की जगह 'वनतुलसी' की माला  चढ़ाया जाता है। यह वनतुलसी केवल इसी ऊंचाई पर उगती है और इसमें एक अलग सुगंध होती है।

  3. नर और नारायण- बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के तट पर नर और नारायण नाम के दो पर्वत के बीच स्थित है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है। 

  4. भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति- बद्रीनाथ मंदिर में श्रीहरि विष्णु की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई, जो चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में निवास करते हैं। कहते हैं जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर बद्रीनाथ धाम आते हैं वो जरूर पूरा होता है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा करने वाले भक्तों पर सदैव भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। 

  5. 6 महीने की खुले रहते हैं मंदिर के कपाट-  हर साल बद्रीनाथ  मंदिर के कपाट भक्तों के लिए छह महीने के लिए बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां बैकुंठ कहा जाता है, यहां  विष्णु जी 6 माह जागते हैं और 6 माह निद्रा अवस्था में रहते हैं।

  6. शंकराचार्य द्वारा मूर्ति का पुनरुद्धार-  पौराणिक कथा के अनुसार, शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी में शालिग्राम पत्थर से बनी भगवान बद्री नारायण की एक काली पत्थर की प्रतिमा खोजी थी। उन्होंने मूल रूप से इसे तप्त कुंड के गर्म झरनों के पास एक गुफा में स्थापित किया था। सोलहवीं शताब्दी में, गढ़वाल के राजा ने मूर्ति को मंदिर के वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया।

  7.  तीन चाबियों से खुलता है बद्रीनाथ मंदिर के कपाट- बद्रीनाथ धाम मंदिर के कपाट एक चाबी से नहीं बल्कि तीन-तीन चाबियों से खुलता है और ये तीनों चाबियां अलग-अलग लोगों के पास होती हैं। 

  8.  मंदिर के रक्षक 'घंटाकर्ण'- बद्रीनाथ धाम के द्वारपाल भगवान शिव के परम भक्त 'घंटाकर्ण' माने जाते हैं। मंदिर खुलने से पहले उनकी अनुमति और पूजा अनिवार्य मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, घंटाकर्ण ने बद्रीनाथ में उसी स्थान पर तपस्या की, जहां भगवान नारायण ने अपनी तपस्या की थी, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण की तपस्या से प्रसन्न होकर दर्शन दिए और उसे बद्रीनाथ धाम का क्षेत्रपाल नियुक्त किया।

  9. भविष्य बद्री- मान्यताओं के अनुसार, कलयुग के अंत में जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, तब बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो जाएगा। इसके बाद भगवान बद्रीनाथ की पूजा 'भविष्य बद्री' नामक स्थान पर होगी, जो जोशीमठ के पास स्थित है।

  10. तप्त कुंड-  मंदिर के ठीक नीचे 'तप्त कुंड' है, जहाँ प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है। बाहर तापमान माइनस में होने के बावजूद इस कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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