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Char Dham Yatra: क्यों कहते हैं जीवन में एक बार चार धाम यात्रा जरूर करनी चाहिए? सनातन धर्म में इस यात्रा का क्या है महत्व

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Apr 23, 2026 02:38 pm IST,  Updated : Apr 23, 2026 02:44 pm IST

Char Dham Yatra: कहते हैं हर व्यक्ति को अपने जीवन में चार धाम यात्रा जरूर करनी चाहिए। लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है और इसका महत्व क्या है, यहां हम आपको इसी बारे में बताएंगे।

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क्यों कहते हैं जीवन में एक बार चार धाम यात्रा जरूर करनी चाहिए? Image Source : INDIA TV

Char Dham Yatra: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस यात्रा को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। यह यात्रा न केवल मानसिक शांति और दैवीय आशीर्वाद प्रदान करती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। इसलिए कहा जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इन चार पवित्र धामों के दर्शन जरूर करने चाहिए। 

चार धाम के खुलने और बंद होने की तारीख 2026

  • गंगोत्री धाम यात्रा - 19 अप्रैल से 10 नवंबर तक
  • यमुनोत्री धाम यात्रा- 19 अप्रैल से 11 नवंबर तक
  • केदारनाथ धाम यात्रा- 22 अप्रैल से 11 नवंबर तक
  • बद्रीनाथ धाम यात्रा - 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक

चार धाम यात्रा का महत्व

  • धर्म ग्रंथों के अनुसार चार धाम यात्रा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाती है। माना जाता है कि इन चार धामों के दर्शन मात्र से ही मनुष्य को उसके जन्मों-जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। 
  • कहते हैं चार धाम की यात्रा करने से मनुष्य के भीतर का अहंकार नष्ट हो जाता है और संयम का संचार होता है।
  • कहा जाता है केदारनाथ में भगवान शिव और बद्रीनाथ में भगवान विष्णु के दर्शन तो गंगोत्री में भागीरथी नदी और यमुनोत्री में यमुना के दर्शन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
  • हिमालय की दिव्य वादियों में तीर्थयात्रा से भक्तों को ईश्वर की ऊर्जा महसूस होती है जिससे मानसिक शांति मिलती है।
  • यह यात्रा एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देती है।

चार धाम किसने बनवाए?

कहते हैं उत्तराखंड में स्थित चार धाम मंदिर किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं बनवाए गए, बल्कि इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में कई साधु-संतों, भक्तों और शासकों द्वारा करवाया गया है। 

  1. बद्रीनाथ: पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ मंदिर देवताओं ने बनाया था। लेकिन ऐतिहासिक रूप से आदि शंकराचार्य ने 8वीं सदी में यहां भगवान बद्री की मूर्ति की स्थापना की थी। इसके बाद में कई शासकों और भक्तों ने मंदिर के विकास में योगदान दिया।
  2. केदारनाथ: माना जाता है कि पांडवों ने युद्ध में अपने ही लोगों की हत्या के पाप का प्रायश्चित करने के लिए ये मंदिर बनाया था। बाद में ऋषि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी ईस्वी में इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया। 
  3. गंगोत्री: कहते हैं इस मंदिर का निर्माण अमर सिंह थापा ने 18वीं शताब्दी के अंत में करवाया था। यह मंदिर गंगा नदी के उद्गम के पास स्थित है।
  4. यमुनोत्री: ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर टिहरी के शासक नरेश सुदर्शन शाह द्वारा 1829 में बनवाया गया था। लेकिन कहा जाता है कि एक बार प्राकृतिक आपदा के कारण यह मंदिर नष्ट हो गया था, जिसके बाद जयपुर की रानी गुलारिया देवी ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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