मॉस्कोः इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भयंकर युद्ध पर रूस का बहुत बड़ा बयान सामने आया है। रूस ने इजरायल-ईरान और अमेरिका के युद्ध को सुलझाने के लिए भारत की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। रूस ने कहा: भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में अमेरिका-इजरायल संकट का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
"ईरान-इजरायल-अमेरिका संकट सुलझाने में भारत की भूमिका अहम"
रूस ने कहा है कि ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध से उत्पन्न गंभीर वैश्विक संकट को सुलझाने में भारत की भूमिका अहम है। रूसी विदेश मंत्रालय और उच्चस्तरीय राजनयिकों ने कहा कि भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में इस संकट का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है। रूस का मानना है कि वर्तमान युद्ध ने मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन बाधित हुआ है। इससे विश्व स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। रूसी प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों से उत्पन्न इस गंभीर संकट का समाधान निकालने में भारत निश्चित रूप से महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।”
भारत के इजरायल-अमेरिका और ईरान से अच्छे संबंध
भारत की भूमिका को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली के अमेरिका, इजरायल, ईरान और रूस सभी प्रमुख पक्षों के साथ संतुलित और अच्छे संबंध हैं। भारत ने युद्ध की शुरुआत से ही संयम बरता है, किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया और शांति की अपील की है। रूस के अनुसार, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और ग्लोबल साउथ में बढ़ती प्रतिष्ठा उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ईरान से तेल आयात करता है, इजरायल के साथ रक्षा सहयोग मजबूत है और अमेरिका के साथ क्वाड तथा अन्य मंचों पर साझेदारी रखता है। ऐसे में भारत सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर ला सकता है। रूस ने पहले भी भारत को मध्यस्थता के लिए प्रोत्साहित किया है।
मध्य-पूर्व से लेकर पूरी दुनिया पर ईरान युद्ध का बुरा असर
रूसी राजनयिकों ने कहा कि इस युद्ध से सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा है। ऐसे में भारत जैसे तटस्थ और प्रभावशाली देश की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने पहले भी कहा था कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है।