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ईरान होर्मुज को बंद नहीं रखना चाहता, वह इसे खुद खुला रखना चाहता है...मगर हमने ब्लॉकेड कर रखा हैः ट्रंप

 Published : Apr 22, 2026 07:56 am IST,  Updated : Apr 22, 2026 08:32 am IST

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान खुद ही होर्मुज को खुला रखना चाहता है, क्योंकि इसके बंद होने से उसे रोजाना 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।- India TV Hindi
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। Image Source : AP

Iran US War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं रखना चाहता, बल्कि वह उसे खुला रखना चाहता है। ताकि वह रोजाना 500 मिलियन डॉलर कमा सके। अगर इसे बंद रखा जाएगा तो वह रोजाना यह नुकसान झेल रहा है। वह केवल इसलिए कह रहे हैं कि वह इसे बंद करना चाहते हैं, क्योंकि मैंने इसे ब्लॉकेड कर रखा है। इसलिए वह अपनी इज्जत बचाना चाहते हैं।" चार दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहने लगे, "सर, होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलना चाहता है, लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं तो ईरान के साथ कभी डील नहीं हो सकती, जब तक कि हम उनके देश के बाकी हिस्से को उनके नेताओं सहित उड़ा न दें।"

बैकफुट पर ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप भले ही यह कह रहे हों कि वह ईरान पर हावी हैं, लेकिन सच यह है कि अमेरिका बैकफुट पर है। इसीलिए ट्रंप ने ईरान-अमेरिका के बीच बुधवार को खत्म हो रहे सीजफायर को एकतरफा बढ़ाने का ऐलान कर दिया। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण ईरान का अपनी शर्तों और मांगों से पीछे नहीं हटना है। ईरान अपने मुद्दों पर अडिग है। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी शुरू होगी, जब वह ईरानी पोर्ट से ब्लॉकेड को हटायेगा। इसके अलावा ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की शर्त पर भी अड़ा है। जबकि इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हवाले यह दावा किया था, लेकिन ईरान ने ट्रंप के दावों को झूठा और मनगढ़ंत करार देकर उनके मंसूबों की हवा निकाल दी।

ईरानी बंदरगाहों से ब्लॉकेड भी हटाएंगे ट्रंप

संकेतों से साफ पता चलता है कि ट्रंप अब सीजफायर को आगे बढ़ाने के साथ ही साथ ईरानी बंदरगाहों से ब्लॉकेड भी हटा सकते हैं। उन्होंने 2 दिन पहले खुद भी कहा था कि मुनीर ने उन्हें बताया है कि ईरानी पोर्ट्स पर अमेरिकी नौसेना का ब्लॉकेड शांति वार्ता के आगे न बढ़ने की वजह है। इसलिए वह मुनीर के इस कथन पर विचार करेंगे। अब संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने दावा किया है कि ट्रंप ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज से ब्लॉकेड हटाने को तैयार हैं। ऐसा हुआ तो यह अमेरिका को बिलकुल बैकफुट पर लाने जैसा कदम होगा। वैसे भी अमेरिका मिडिल-ईस्ट में तबाह हुए अपने सैन्य अड्डों और ईरानी हमलों से खाड़ी देशों को पहुंचे भारी नुकसान के बाद बैकफुट पर है। ट्रंप अब किसी भी तरह इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं। 

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