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ओवल ऑफिस की उस गुप्त ब्रीफिंग में क्या हुआ? जिसके बाद ट्रंप ने ईरान से सीजफायर पर पलटा फैसला

 Published : Jul 10, 2026 02:49 pm IST,  Updated : Jul 10, 2026 02:49 pm IST

ओवल ऑफिस में मिली नई खुफिया जानकारी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम पर अपना रुख बदल दिया। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर हमला किया, जिसके बाद हमले तेज हुए। ईरान ने आरोपों से इनकार करते हुए अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया।

ओवल ऑफिस में हुई...- India TV Hindi
ओवल ऑफिस में हुई सीक्रेट मीटिंग के बाद ट्रंप सीजफायर से पलट गए। Image Source : AP

Highlights

  • ओवल ऑफिस में मिली खुफिया ब्रीफिंग के बाद ट्रंप ने ईरान से सीजफायर पर अपना रुख बदल दिया।
  • अमेरिका ने ईरान पर 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए और कई रियायतें वापस ले लीं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते को संकट में डाल दिया।

वॉशिंगटन: महज 2 हफ्ते पहले ईरान के साथ हुए युद्धविराम समझौते को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक अपना रुख बदल लिया। इसके बाद अमेरिका ने न केवल समझौते के कई अहम हिस्से वापस ले लिए, बल्कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई भी शुरू कर दी। इस फैसले के पीछे व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई एक गुप्त खुफिया ब्रीफिंग को अहम वजह बताया जा रहा है।

खुफिया रिपोर्ट में क्या बताया गया?

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप तुर्किये में NATO समिट के लिए रवाना होने से ठीक पहले ओवल ऑफिस में एक इमरजेंसी बैठक हुई। इसी मीटिंग में मिली नई खुफिया जानकारी ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन से हमला किया है। कुछ ही घंटों के भीतर 3 व्यापारिक जहाज निशाना बने, जिनमें एक LNG टैंकर भी शामिल था।

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Image Source : APईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले किए थे।

अमेरिका ने तुरंत बदला अपना रुख

बताया गया कि यह जानकारी मिलने के बाद ट्रंप बेहद नाराज हो गए और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान वास्तव में स्थायी शांति समझौता चाहता भी है या नहीं। वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों से चर्चा के बाद ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ईरान युद्धविराम समझौते का ईमानदारी से पालन नहीं कर रहा है। इसके कुछ ही घंटों बाद ट्रंप प्रशासन ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत दी गई कई रियायतें वापस लेना शुरू कर दिया। अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति रद्द कर दी और होर्मुज के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार हवाई हमलों की मंजूरी दे दी।

NATO सम्मेलन में ट्रंप का सख्त संदेश

व्हाइट हाउस ने यह चेतावनी भी दी कि यदि तनाव जारी रहा तो जरूरत पड़ने पर नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे बिजली संयंत्र और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्र भी निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि ट्रंप ने कहा कि वह ऐसी नौबत नहीं आने देना चाहते। तुर्किये के अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि यह शांति समझौता बच पाएगा। उन्होंने कहा,

'मेरे हिसाब से यह समझौता खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं और बेहद खतरनाक लोग हैं।'

ईरान ने अमेरिका के आरोप खारिज किए

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। एक ईरानी राजनयिक ने 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' से कहा कि अमेरिका ने पहले समझौते का उल्लंघन किया। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन ने तेहरान से बिना सलाह किए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में दक्षिणी समुद्री मार्ग खोल दिया, जबकि यह समझौते की शर्तों के खिलाफ था। ईरान का कहना है कि इसी वजह से उसने उस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की। उसका दावा है कि जहाजों को ईरानी तट के पास उत्तरी मार्ग से गुजरना चाहिए था और दक्षिणी रास्ता सुरक्षित नहीं था।

समझौते की सबसे बड़ी कमजोरी क्या थी?

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिम शांति समझौते में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता तो सुनिश्चित की गई थी, लेकिन यह साफ नहीं किया गया था कि होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की निगरानी, संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी। यही अस्पष्टता बाद में दोनों देशों के बीच बड़े विवाद की वजह बन गई। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

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Image Source : APअमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर ताजा हमले किए थे।

अमेरिकी नौसेना क्या कर रही थी?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कई सप्ताह से अमेरिकी नौसेना ओमान के तट के पास दक्षिणी समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद कर रही थी। करीब 125 से अधिक जहाज अमेरिकी नौसेना की निगरानी में इस मार्ग से गुजर चुके थे। यह अभियान ज्यादातर रात के समय चलाया गया। जहाजों ने अपनी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद रखी और रेडियो के जरिए अमेरिकी नौसेना तथा शिपिंग ऑपरेटरों के संपर्क में रहे। अमेरिका का कहना है कि यह कदम केवल व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए उठाया गया था।

फिर शुरू हुई जवाबी सैन्य कार्रवाई

ताजा समुद्री हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था। दो दिनों के भीतर अमेरिका ने 170 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका और भी व्यापक हमले करेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सख्त संदेश देते हुए कहा, 'सौदा बिल्कुल साफ है। अगर वे जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे।'

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Image Source : APडोनाल्ड ट्रंप ने अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान हमला न करने की बात कही थी।

हमलों के बाद ट्रंप ने जताई नाराजगी

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को देखते हुए बातचीत एक सप्ताह के लिए रोक दी थी, ताकि कूटनीति को मौका मिल सके। उन्होंने कहा, 

'हमने उन्हें समय दिया, लेकिन उसकी जगह उन्होंने जहाजों पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए।'

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस तरह जिस अंतरिम शांति समझौते से क्षेत्र में स्थिरता आने की उम्मीद थी, वह अब गंभीर संकट में दिखाई दे रहा है और मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।

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