संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए "अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित" आरोपों को कड़े शब्दों में खारिज कर दिया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान बच्चों के खिलाफ अत्याचारों और सीमा पार आतंकवाद से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दुनिया 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले को भूली नहीं है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने निर्दोष पर्यटकों की जान ली थी।
UNSC में भारत ने किया बेनकाब
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने यह बात "बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों को समाप्त करने और रोकने के लिए प्रभावी रणनीति" विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कही। राजदूत हरीश ने कहा, “पाकिस्तान न सिर्फ बच्चों के अधिकारों का हनन कर रहा है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर भारत को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद CAAAC (बच्चों और सशस्त्र संघर्ष) के गंभीर उल्लंघनकर्ताओं में से एक है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की हालिया रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का दिया हवाला
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ 99 गंभीर उल्लंघनों के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 86 बच्चे (27 लड़के, 14 लड़कियां, 45 अज्ञात लिंग) पीड़ित हैं। 13 मामलों में स्कूलों पर हमले किए गए, खासतौर से लड़कियों के स्कूलों को निशाना बनाया गया। अफगान सीमा से लगे इलाकों में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा की गई सीमा पार गोलीबारी और हवाई हमलों में अफगान बच्चों की जानें गईं या वे घायल हुए। राजदूत हरीश ने कहा, “ऐसे व्यवहार के बावजूद इस वैश्विक मंच से उपदेश देना घोर पाखंड है।”
पहल्गाम हमला और पाकिस्तानी गोलाबारी का जिक्र
भारत ने 22 अप्रैल को पहल्गाम में हुए आतंकी हमले की याद दिलाई, जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की बात कही थी। इसके अलावा मई 2025 में पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पर जानबूझकर की गई गोलाबारी का भी उल्लेख किया, जिसमें कई निर्दोष नागरिकों की जान गई।
जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्पष्ट स्थिति
राजदूत हरीश ने दोहराया, “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, चाहे पाकिस्तान कितना भी झूठ फैलाए। उन्होंने कहा कि “बच्चे चरमपंथी विचारधारा और आतंकवादी संगठनों की भर्ती प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। ऐसे में पाकिस्तान बच्चों पर अत्याचार कर रहा है। अब समय आ गया है कि सभी सदस्य देश राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर, आतंकी अपराधियों और उनके राज्य प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराएं।” (भाषा)