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ट्रंप ने शुरू की अमेरिकी तेल और गैस भंडारों की मार्केटिंग, किया दुनिया के तेल आयातकों को रिझाने वाला पोस्ट

 Published : Apr 11, 2026 06:04 pm IST,  Updated : Apr 11, 2026 06:04 pm IST

ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के बीच ट्रंप ने अपने देश में मौजूद तेल और गैस भंडारों की खुली मार्केटिंग शुरू कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये दुनिया के तेल आयातकों को आकर्षित करने का प्रयास किया।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। Image Source : AP

वाशिंगटनः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी तेल और गैस भंडारों की मार्केटिंग करना शुरू कर दिया है। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका की तेल क्षमता की जोरदार तारीफ की है। उन्होंने लिखा, "दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकरों की भारी संख्या, जो पूरी तरह खाली हैं। अभी इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर जा रहे हैं, ताकि दुनिया के सबसे बेहतरीन और 'सबसे मीठे' तेल (और गैस!) से भर सकें। हमारे पास अगले दो सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों के कुल मिलाकर जितना तेल है, उससे भी ज्यादा तेल है-और उसकी गुणवत्ता भी कहीं बेहतर है। हम आपका इंतजार कर रहे हैं। जल्दी से लोडिंग हो जाएगी!"

दुनिया के तेल बाजारों में अस्थिरता के बीच ट्रंप ने किया पोस्ट

ट्रंप का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता है। हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण कई देशों को तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान से जुड़े विवाद और क्षेत्रीय अशांति के चलते कई टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे दुनिया भर के बाजारों में तेल की मांग बढ़ गई है। ऐसे में अमेरिका की ओर खाली सुपरटैंकरों (VLCC) का रुख होना अमेरिकी तेल निर्यात की मजबूती को दर्शाता है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बनाने पर जोर दे रहा है। 

क्या है अमेरिका की तेल उत्पादन क्षमता

आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका ने औसतन 13.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल उत्पादन किया, जो रूस के लगभग 9.87 मिलियन बैरल और सऊदी अरब लगभग 9.51 मिलियन बैरल से कहीं अधिक है। यानी अमेरिका अकेले अगले दो सबसे बड़े उत्पादकों से ज्यादा तेल निकाल रहा है। इसके अलावा अमेरिकी तेल 'लाइट स्वीट क्रूड' के रूप में जाना जाता है, जो आसानी से रिफाइन होता है और गैसोलीन बनाने के लिए बेहद उपयुक्त है। इसकी गुणवत्ता दुनिया के कई अन्य तेलों से बेहतर मानी जाती है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका के पास न केवल मात्रा में ज्यादा तेल है, बल्कि उसकी क्वालिटी भी सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े टैंकर जल्दी से अमेरिकी तेल लोड करके वापस लौट सकते हैं। उनका यह बयान अमेरिका की ऊर्जा स्वतंत्रता और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने वाला है। 

ट्रंप का फोकस अमेरिका की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर

ट्रंप की नीतियों के तहत अमेरिका पहले से ही तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने, नए क्षेत्रों में ड्रिलिंग की अनुमति देने और पर्यावरण नियमों को आसान बनाने पर काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव के कारण कई देश अब अमेरिकी तेल की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिका होर्मुज मार्ग पर बहुत कम निर्भर है, जबकि कई एशियाई और यूरोपीय देश इस मार्ग से गुजरने वाले तेल पर निर्भर थे। ऐसे में अमेरिकी तेल निर्यात बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति में स्थिरता आ सकती है और कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। ट्रंप की यह पोस्ट उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' ऊर्जा नीति का हिस्सा है। उन्होंने पहले भी कहा था कि अमेरिका को अपनी तेल और गैस क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहिए ताकि देश आर्थिक रूप से मजबूत बने और दुनिया पर निर्भर न रहे।

 

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