न्यूयॉर्क/वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह रूस पर दूसरे चरण के प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं। ट्रंप से ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के बाहर पूछा गया था कि क्या वह रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं, इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हां, मैं तैयार हूं।’’ ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका और यूरोपीय संघ रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर और अधिक प्रतिबंध लगाते हैं तो रूसी अर्थव्यवस्था ‘ध्वस्त’ हो जाएगी।
अमेरिका उठा सकता है सख्त कदम
डोनाल्ड ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका रूस को लेकर सख्त कदम उठा सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच जंग में अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन का साथ दे रहे हैं। अमेरिका ने यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई के साथ-साथ आर्थिक मदद भी दी है। हांलांकि, ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं तब से यूक्रेन को लेकर अमेरिका के रुख में बदलाव आया है। ट्रंप और वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस में क्या हुआ था इसे भी पूर दुनिया देख चुकी है।
परमाणु हथियारों के मामले में कौन है ताकतवर?
ट्रंप कब किस तरह का फैसला लेंगे इसके बारे में कुछ भी कह पाना आसान नहीं है। मौजूदा समय में अमेरिका और रूस के बीच सीधे टकराव की कोई स्थिति तो नजर नहीं रही है लेकिन, समय कब और कैसे बदल जाए इस बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता है। चलिए ऐसे में एक नजर इस बात पर डालते हैं कि परमाणु हथियारों के मामले में रूस और अमेरिका के बीच कौन सबसे अधिक ताकतवर है।
परमाणु हथियारों की संख्या
विश्व में सबसे अधिक परमाणु हथियार रूस के पास हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार रूस के पास लगभग 5,900 परमाणु वॉरहेड्स हैं। इनमें से काफी संख्या सक्रिय तैनाती पर है, जबकि बाकी रिजर्व में रखे गए हैं। अमेरिका के पास लगभग 5,200 परमाणु वॉरहेड्स हैं। इनमें से भी काफी संख्या सक्रिय है और बाकी सुरक्षित रखे गए हैं।
परमाणु परीक्षण और शोध
परमाणु तकनीक में सबसे पहले आगे बढ़ने वाला देश अमेरिका था। उसने सैकड़ों परमाणु परीक्षण किए और आज भी परमाणु ऊर्जा व हथियार तकनीक में शीर्ष पर है। सोवियत संघ ने अमेरिका को जवाब देने के लिए परमाणु शोध पर जोर दिया। रूस ने भी कई परमाणु परीक्षण किए और आज उसकी शोध क्षमता बेहद उन्नत मानी जाती है। रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों बराबरी पर खड़े हैं, लेकिन अमेरिका की शुरुआती बढ़त आज भी उसे वैज्ञानिक श्रेष्ठता देती है।
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