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नीतीश के अति पिछड़ा वोटबैंक पर कांग्रेस की नजर, शुरू किया ‘जाति नहीं, जमात’ अभियान

 Published : Apr 22, 2025 03:22 pm IST,  Updated : Apr 22, 2025 04:00 pm IST

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस एक्टिव हो चुकी है। कांग्रेस ने राज्य में नीतीश कुमार के अति पिछड़ा वोटबैंक में सेंधमारी के लिए अभियान शुरू किया है।

नीतीश के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्लान।- India TV Hindi
नीतीश के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्लान। Image Source : PTI

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। भाजपा, जदयू, कांग्रेस और राजद समेत विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अनपी चुनावी तैयारियों को लॉन्च कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के बाद बिहार में पार्टी के नेता लगातार एक्टिव हो चुके हैं। राज्य में कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन समेत कई मुद्दों पर सीएम नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को घेर रही है। वहीं, अब कांग्रेस ने सीएम नीतीश कुमार के अति पिछड़ा वोटबैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश शुरू कर दी है। कांग्रेस पार्टी ने बिहार में ‘जाति नहीं, जमात’ अभियान शुरू किया है।

क्या है अभियान का मकसद?

कांग्रेस पार्टी के ओबीसी विभाग ने बिहार में जाति नहीं, जमात अभियान आगामी चुनाव को देखते हुए लॉन्च किया है। कांग्रेस के इस अभियान का मकसद बिहार के अति पिछड़ा समुदाय को अपनी ओर लाना है। कांग्रेस की ओर से अति पिछड़ा समुदाय को ये भी भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि चुनाव में टिकट बंटवारे में उन्हें आबादी के अनुपात में हिस्सा मिलेगा।

कांग्रेस के ओबीसी विभाग के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने इस अभियान के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि इस अभियान का मकसद अति पिछड़ी जातियों में जागरुकता पैदा करने की कोशिश करना और उन्हें बताना है कि वह जाति नहीं, बल्कि जमात (वर्ग) के तौर पर अपने वोट का इस्तेमाल करें। अनिल जयहिंद ने ये भी कहा है कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस के टिकट बंटवारे में अति पिछड़ों को आबादी के हिसाब से टिकट मिले।

CM नीतीश का वोट बैंक है अति पिछड़ा समुदाय

बिहार में कुछ समय पहले जातिगत सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वे के मुताबिक, बिहार में अति पिछड़ों की जनसंख्या करीब 36 प्रतिशत है। अति पिछड़ों को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। अनिल जयहिंद ने दावा किया है कि नीतीश कुमार की पार्टी बिखर रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस की कोशिश है कि अति पिछड़ों को अपने साथ लाया जाए ताकि वे भाजपा के साथ न चले जाए।

बिहार में कब है चुनाव?

साल 2025 के आखिर में बिहार में विधानसभा चुनाव का आयोजन होने वाला है। CM नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार का कार्यकाल 23 नवंबर 2020 से शुरू हुआ था। सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 तक है। अनुमान के मुताबिक, नवंबर महीने की शुरुआत में बिहार में चुनाव के लिए वोटिंग होगी। बिहार में मुख्य मुकाबला भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के NDA और राजद, कांग्रेस के महागठबंधन के बीच होना है। (इनपुट: भाषा)

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