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VIDEO: बिहार का अनोखा सरकारी स्कूल, जहां न बिल्डिंग, न ही बेंच; पेड़ के चारों ओर बने चबूतरे पर ब्लैक बोर्ड

 Published : Jul 26, 2025 04:48 pm IST,  Updated : Jul 26, 2025 05:36 pm IST

दरभंगा जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर एक सरकारी स्कूल 20 साल से चल रहा है। लेकिन स्कूल में न बिल्डिंग है और न ही बेंच है। स्कूल में करीब 150 बच्चे पढ़ने आते हैं।

दरभंगा का सरकारी स्कूल- India TV Hindi
दरभंगा का सरकारी स्कूल Image Source : REPORTER INPUT

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पिछले 20 साल से बिना इमारत के चल रहा है। जो शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति को एक बार फिर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हनुमाननगर प्रखंड के गोदियारी गांव में प्राथमिक विद्यालय लावाटोल की यह कहानी न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का उदाहरण है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है। 

स्कूल में न तो क्लासरूम है, न ही ब्लैकबोर्ड और न ही बेंच

यह स्कूल खुले आसमान के नीचे संचालित होता है। यहां न तो क्लासरूम है, न ही ब्लैकबोर्ड और न ही बेंच। बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। ब्लैकबोर्ड के लिए विशाल पीपल के पेड़ के चारों ओर सीमेंट के चबूतरे पर कोटिंग की गई है। स्कूल में बारी-बारी से एक से लेकर पांच क्लास तक को शिक्षक पढ़ाते हैं। स्कूल में कुल छह शिक्षक हैं जिसमें चार बीपीएससी से चयनित शिक्षक एंव दो नियोजित शिक्षक हैं।

2003 से चल रहा है सरकारी स्कूल

जानकारी के अनुसार, 2003 में जब आरजेडी कि सरकार थी तब अति पिछड़ा क्षेत्र के बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए लोक शिक्षा केन्द्र नामक एक प्रयास कि शुरुआत की गई थी। इसमें सरकार की सोच थी कि अति पिछड़ा के बच्चों को शिक्षित किया जाय। फिर तीन साल बाद 2006 में प्राथमिक विद्यालय में मर्ज किया गया था लेकिन शुरू से ही विद्यालय का अपना भवन नहीं रहा‌।

अभी तक नहीं बन गई स्कूल की बिल्डिंग

वहीं, स्कूल के प्रधानाचार्य ने 2006 से कई बार सरकार एंव जिल प्रशासन से इमारत के लिए गुहार लगाई है, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला है। ग्रामीणों ने 2016 में सरकारी जमीन उपलब्ध कराने के लिए लोक शिकायत भी दर्ज कराई थी। हाल ही में 19.05.2025 को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अंचल पदाधिकारी को भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। यह इलाका जेडीयू विधायक और बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी का है। इस स्कूल की हालत शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर दिखाती है। "यहाँ किताबें खुलती है लेकिन छत नहीं। बच्चे पढ़ते हैं, बारिश हो तो घर भागो"।

बारिश आते ही हो जाती है छुट्टी

वहीं स्कूल कि पांचवी की छात्रा अंजली कुमारी ने बताई कि जब बारिश आती है तो घर जाना पड़ता है या फिर तेज घूप रहती है तो छाप में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हम लोगों की भी इच्छा है कि स्कूल का अपना भवन हो जहां हम लोग बैंच डैस्क पर बैठकर पढ़ाई करें। कुछ दिन पहले की बात है जब हम लोग बैठकर पढ़ रहे थे। तभी मेरी सहेली के ऊपर पेड़ से डाली टूट कर गिर गया था। खतरा बना रहता है लेकिन करेंगे क्या हम लोग सरकार से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द भवन बन जाय जिसमें अच्छी से पढ़ाई कर पायें। 

पेड़ के नीचे चल रहा है सरकारी स्कूल

वहीं स्कूल की छात्रा रानी कुमारी ने कहा कि हम लोग जब से स्कूल में पढ़ाई करने आयें है तो पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई किए। हम लोगों कि इच्छा है कि स्कूल का अपना भवन हो जहां हम लोग अच्छा से पढ़ाई कर सकें।

वहीं पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सुरेश प्रसाद सिंह  ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि दुख कि है जो पेड़ के नीचे विद्यालय चल रहा है। यह नहीं होना चाहिए था लेकिन अब जमीन उपलब्ध हो रहा है विभागीय प्रक्रिया चल रही है। सरकार से अब बस यहीं मांग है जो जल्द से जल्द फंड मुहैया कर दे जो स्कूल का भवन बन जाय।

रिपोर्ट- जितेंद्र कुमार, दरभंगा

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