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तेजस्वी यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, जातिगत जनगणना को लेकर कही ये बात

 Written By: Avinash Rai @RaisahabUp61
 Published : May 03, 2025 10:28 am IST,  Updated : May 03, 2025 10:28 am IST

केंद्र सरकार ने देश में जातिगत जनगणना कराने का फैसला किया है। इसे लेकर तेजस्वी यादव पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा, 'जाति जनगणना कराना सामाजिक न्याय की लंबी यात्रा का पहला कदम है।'

Tejashwi Yadav wrote a letter to PM Narendra Modi said this about caste census- India TV Hindi
तेजस्वी यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र Image Source : PTI

केंद्र सरकार ने देश में जातिगत जनगणना कराने का फैसला किया है। इसके मद्देनजर राजद के नेता तेजस्वी यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा, "आदरणीय प्रधानमंत्री जी, देश भर में जाति जनगणना कराने की आपकी सरकार की हाल की घोषणा के बाद, मैं आज आपको सतर्क आशावाद की भावना के साथ लिख रहा हूं। वर्षों से आपकी सरकार और एनडीए गठबंधन ने जाति जनगणना की मांग को विभाजनकारी और अनावश्यक बताकर खारिज कर दिया था। जब बिहार ने अपने संसाधनों से जाति सर्वेक्षण कराने की पहल की, तो केंद्रीय सरकार और उसके शीर्ष कानून अधिकारी ने हर कदम पर बाधाएं खड़ी कीं। आपकी पार्टी के सहयोगियों ने इस तरह के डेटा संग्रह की आवश्यकता पर ही सवाल उठाया।" 

पीएम मोदी को तेजस्वी यादव ने लिखा पत्र

तेजस्वी यादव ने लिखा, "अनेक प्रकार कि फूहड़ और अशोभनीय टिप्पणियां कि गईं। आपका विलंबित निर्णय उन नागरिकों की मांगों की व्यापकता को स्वीकार करता है, जिन्हें लंबे समय से हमारे समाज के हाशिये पर रखा गया है। बिहार के जाति सर्वेक्षण ने, जिसमें पता चला कि ओबीसी और ईबीसी हमारे राज्य की आबादी का लगभग 63% हिस्सा हैं, यथास्थिति बनाए रखने के लिए फैलाए गए कई मिथकों को तोड़ दिया। इसी तरह के पैटर्न देश भर में सामने आने की संभावना है। मुझे यकीन है कि यह खुलासा कि वंचित समुदाय हमारी आबादी का अधिकांश हिस्सा होने के बावजूद हर जीवन क्षेत्र में कम प्रतिनिधित्व रखते हैं, एक लोकतांत्रिक जागरण पैदा करेगा।"

जातिगत जनगणना पर कही ये बात

तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में आगे लिखा, "जाति जनगणना कराना सामाजिक न्याय की लंबी यात्रा का पहला कदम मात्र है। जनगणना के आंकड़ों से सामाजिक सुरक्षा और आरक्षण के दायरे को आबादी के अनुरूप बढ़ाने का ध्येय भी इस प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। एक देश के रूप में, हमारे पास आगामी परिसीमन में कई प्रकार के अन्याय को ठीक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण जनगणना के आंकड़ों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। ओबीसी और ईबीसी का निर्णय लेने वाले संस्थानों में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए। राज्य विधानसभाओं और भारत की संसद में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर इन वंचित समूहों को सम्मिलित किया जाना होगा।"

क्या बोले तेजस्वी यादव

राजद नेता ने आगे कहा, "हमारा संविधान अपने निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से राज्य को आर्थिक असमानताओं को कम करने और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करने का आदेश देता है। जब हम यह जानेंगे कि हमारे कितने नागरिक वंचित समूहों से संबंधित हैं और उनकी आर्थिक स्थिति क्या है, तब अधिक सटीकता के साथ लक्षित हस्तक्षेप तैयार किए जाने चाहिए। निजी क्षेत्र, जो सार्वजनिक संसाधनों का प्रमुख लाभार्थी रहा है, सामाजिक न्याय की आवश्यकताओं से अलग नहीं रह सकता। कंपनियों को पर्याप्त लाभ मिलता रहा है - रियायती दरों पर जमीन, बिजली सब्सिडी, कर छूट, बुनियादी सुविधाएं, और विभिन्न प्रकार का वित्तीय प्रोत्साहन। इसका बोझ करदाता के कंधे उठाते हैं। बदले में, निजी उद्योग क्षेत्र से हमारे देश की सामाजिक संरचना को प्रतिबिंबित करने की अपेक्षा करना पूरी तरह से उचित है। जाति जनगणना के संदर्भ में निजी क्षेत्र में समावेशिता और विविधता के बारे में खुली बातचीत होनी चाहिए।"

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